जून के पहले हफ़्ते से रमज़ान शुरु होने वाले हैं। जून में जहां उत्तर भारत में गर्मी अपने शबाब पर रहती है वहीं मानसून के समय पर आने के भी आसार हैं जो रोज़दार के लिए अच्छी ख़बर हो सकती है। इस बार रमज़ान का पहला रोज़ा सबसे छोटा 15 घंटे 38 मिनट का होगा। जबकि 36 साल बाद 23 जून को सबसे लंबा रोज़ा 15 घंटा 44 मिनट का होगा।
रमज़ान कब से शुरु होंगे ये अभी तय नही है लेकिन मदरसा खानशाह आलिया कादरिया के प्रवक्ता तसनीम मियां कादरी के अनुसार अगर छह जून को चांद का दीदार होता है तो सात जून से रमज़ान शुरु हो जाएंगे। पहले रोजे में सहरी सुबह 3:35 बजे और इफ़्तार शाम 7:13 बजे होगी। 17 वें रोजे (23 जून) में सुबह 3:35 बजे सहरी होगी और शाम 7:19 बजे इफ्तार किया जाएगा। 17वां रोज़ा रमज़ान माह का सबसे बड़ा रोज़ा होगा। इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से इससे बड़ा रोज़ा नहीं होता और 36 साल बाद ऐसा होता है। इससे पहले 1980 में 15 घंटा 44 मिनट का रोज़ा हुआ था।
छह जुलाई को हो सकती है ईद
सात जून से अगर रमजान शुरू होते हैं तो छह जुलाई को ईद होगी। इससे पहले सात दिन यानी 29 जून से रोजे खत्म होने तक इफ्तार का समय शाम 7:15 बजे रहेगा। जबकि सहरी का समय बदलेगा। इधर, मौसम विज्ञानियों के अुनसार जून में मानसून आने के आसार दिख रहे हैं। इसलिए इस पूरे महीने मौसम बदलता रहेगा। इससे रोजेदारों को गर्मी से राहत मिल सकती है।
14 साल से बड़े लोगों के लिए अनिवार्य हैं रोज़े रखना
इस्लाम में 14 साल से ऊपर के उम्र वालों को बालिग करार दिया गया है। इसलिए इनका रोजा रखना फर्ज़ है। भूखे पेट रहने से ही रोज़ा नहीं होता। आंख, कान, नाक, मुहं आदि का भी रोजा होता है। इस पूरे महीने रोज़ेदारों को अल्लाह की इबादत करनी चाहिए और दान पूण्य करना चाहिए।