नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि अर्थव्यवस्था में तेजी के संकेत मिल रहे हैं, इसलिए वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) और वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बावजूद सरकार वित्तीय घाटा के लक्ष्य को लेकर चिंतित नहीं है। जेटली ने एक समाचारपत्र के कार्यक्रम में में यहां कहा, "साधारणत: जब वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाती हैं, तो बढ़े हुए वेतन और पेंशन इस मद में आम तौर पर पालन की जाने वाली 2.5 फीसदी बजटीय सीमा पर दबाव डालते हैं।"
जेटली ने कहा, "यह दबाव शुरुआती दो-तीन साल में बढ़ेगा। पर चूंकि अर्थव्यवस्था में भी विस्तार हो रहा है, जिसके साथ सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का आधार भी बड़ा हो रहा है, इसलिए खर्च वहन करने की सरकार की क्षमता भी बढ़ रही है।" मंत्री ने कहा कि विकास का भारतीय मॉडल अब पहले से अधिक बाजारोन्मुख है, लेकिन सरकारी आय के एक बड़े हिस्से को गरीबी उन्मूलन के लिए सामाजिक परियोजनाओं पर खर्च करने की जरूरत है।
साफ है कि सरकार के आय के साधन बढ़ेंगे, तो सरकार ग़रीबी दूर करने और अन्य समाजोन्मुखी कामों पर ज़्यादा खर्च कर सकेगी। जिस तरह से सारी दुनिया के बड़े उद्योग समूह भारत में निवेश करने के लिए इच्छुक नज़र आ रहे हैं, उससे आने वाले वक्त में भारत के आर्थिक हालात में बड़ा सुधार होगा।