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'आप की अदालत' में श्री श्री रविशंकर: 'राहुल गांधी के 'डंडा' वाले बयान को सीरियसली न लें'

श्री श्री ने जवाब दिया: 'किसी भी राजनेता के वक्तव्य पर कमेंट करना मेरा स्वभाव नहीं। इन बातों को सीरियसली लेना भी नहीं चाहिए। जोकर्स को जोक करने के लिए टाइम भी देना चाहिए।'

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: February 16, 2020 0:07 IST

नई दिल्ली: आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने लोगों को सलाह दी है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में राहुल गांधी के 'डंडा' वाले बयान को सीरियसली (गंभीरता से) न लें। उन्होंने कहा-'जोकर्स को जोक करने के लिए टाइम भी देना चाहिए'। श्री श्री से रजत शर्मा के शो 'आप की अदालत' में यह सवाल किया गया कि क्यों राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के बारे में 'डंडा' वाला बयान दिया था। इस पर श्री श्री ने जवाब दिया: 'किसी भी राजनेता के वक्तव्य पर कमेंट करना मेरा स्वभाव नहीं। इन बातों को सीरियसली लेना भी नहीं चाहिए। जोकर्स को जोक करने के लिए टाइम भी देना चाहिए।'

 
CAA पर कम्यूनिकेशन गैप रहा
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, 'भारत की छवि खराब हुई है, सच बात है। जहां-जहां हम गए, हमने समझाया है। कम्यूनिकेशन गैप होने से लोगों को ठीक समझ नहीं आया, बहुत सारी आशंकाएं दूर करनी पड़ीं। पश्चिमी मीडिया में कम्यूनिकेशन गैप की वजह से इस निगेटिविटी आई। वो कोई आइडियोलॉजी लेकर उसी चश्मे से देखते हैं।'
 
दुनिया में भारत की छवि लगातार बेहतर हुई
हालांकि श्री श्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, 'दुनिया में भारत की छवि लगातार बेहतर होती जा रही है, पहले के मुकाबले। इसमें सबसे बड़ा योगदान आईटी इंडस्ट्री का है। प्रधानमंत्री जी के प्रयास से भारत को एक अच्छा दर्जा मिला है।'
 
श्रीलंकाई तमिलों को भारतीय नागरिकता मिले
आध्यात्मिक गुरु श्री श्री ने पिछले 35 वर्षों से शरणार्थियों के रूप में रह रहे 1.25 लाख श्रीलंकाई तमिलों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की बात कही। उन्होंने कहा, 'भारत में पिछले 35 साल से सवा लाख तमिल रिफ्यूजी (शरणार्थी) के रूप में रह रहे हैं। यही लोग जब अमेरिका, इंग्लैंड जाते हैं तो उनको तीन या पांच साल के अन्दर नागरिकता मिल जाती है, यहां 35 साल के बाद भी उन्हें नहीं मिली। जब कलाम राष्ट्रपति थे, तो उनको हमने एक करोड़ दस्तखतों वाला ज्ञापन दिया था। ये तमिल बड़ी दयनीय स्थिति में रह रहे हैं। न तो वो काम कर पाते हैं, उन्हें ढाई से तीन हजार रुपए पर गुजारा करना पड़ता है।
 
जो भी पर्सक्यूटेड माइनोरिटीज सबका स्वागत 
श्री श्री ने पाकिस्तान के अहमदियों को भी नागरिकता देने के पक्ष में बात रखी। उन्होंने कहा- 'पर्सक्यूटेड माइनोरिटीज (सताये गए अल्पसंख्यक) मुसलमानों में भी हैं। उदाहरण के लिए अहमदिया पाकिस्तान में पर्सक्यूटेड हो रहे हैं। जो भी पर्सक्यूटेड माइनोरिटीज हैं, उन सबका स्वागत करना चाहिए।'
 
गुरु को उसकी तपस्या के बल पर उचित स्थान मिलना चाहिए
आध्यात्मिक गुरु ने उन नकली और फर्जी बाबाओं पर जोरदार टिप्पणी की जो यौन उत्पीड़न के आरोप में जेल में कैद हैं। श्री श्री ने कहा, 'न वो संत हैं, न वो ज्ञानी हैं, न वो धार्मिक हैं। ऐसे लोगों को आम आदमी के मुकाबले दोगुनी सजा मिलनी चाहिए।' वहीं जब श्री श्री से राम रहीम के बारे में सवाल किया गया, जिसे बालात्कार के आरोप में दोषी ठहराया गया था, तो उन्होंने तीखी टिप्पणी की, 'जब घट पक्का नहीं है, तो न पानी रुकता है, न घट पानी को रोक सकता है। कच्चे घट पर पानी डाला, न घट बचा, न पानी। किसी भी गुरु को उसकी तपस्या के बल पर उचित स्थान मिलना चाहिए।'
 
सितारवादक रविशंकर की सलाह पर नाम के आगे श्री श्री लगाया
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री ने खुलासा किया कि उन्होंने प्रसिद्ध सितारवादक उस्ताद रविशंकर की सलाह पर अपने नाम के आगे श्री श्री लगाया। श्री श्री ने कहा- 'लोग कन्फ्यूज्ड होते थे। कई बार लोग उनके प्रोग्राम में जाकर कहते कि हमें ध्यान भी करना है और हमारे प्रोग्राम में आते थे पूछने कि संगीत कब शुरू होगा। इसलिए उन्होंने नाम में थो़ड़ा फर्क रखने का सुझाव दिया। भारत में जो संत नाम के आगे श्री लिखते हैं, उसमें या तो तीन या फिर 108 लिखने की परम्परा है। मेरे लिए तीन ज्यादा थे इसलिए दो ही रखा। 
 
बिजनेस कोई गलत काम नहीं
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने श्री श्री प्रोडक्ट्स लॉन्च कर बिजनेस क्यों शुरू कर दिया, आध्यात्मिक गुरु ने कहा: 'ये बिजनेस कोई गलत काम थोड़े है। कितने सारे युवाओं को रोजगार दे रहे हैं। मैं तो इन्वॉल्वड नहीं हूं, पर हम प्रेरणा देते हैं। योग और उद्योग साथ-साथ चलते हैं, उसमें क्या दिक्कत है? नारायण के साथ लक्ष्मी तो रहती हैं,  हमारा देश पीछे इसलिए हो गया क्योंकि हम लोग उद्योग को बेकार मानने लगे। सिर्फ दानपुण्य करना, उसी को श्रेष्ठ समझने लगे। लेकिन खाली बरतन से दान तो नहीं कर सकते। नारायण के साथ लक्ष्मी तो होती हैं। उपनिषदों में ऋषि कहते हैं हजारों गायें हों। सब सम्पन्न हों। सर्वे भवन्तु सुखिनं।
 
कभी-कभी किसी को कड़वा सच बोलना चाहिए
यह पूछने पर कि उन्होंने पाकिस्तानी लड़की मलाला युसुफजई को दिए गए नोबेल शांति पुरस्कार का विरोध क्यों किया था, श्री श्री ने कहा: 'हां, कभी-कभी किसी को कड़वा सच बोलना चाहिए। 16 साल की लड़की ने शांति के लिए क्या किया? वह यह भी नहीं जानती कि क्या करना है।' यह पूछे जाने पर कि क्या वह खुद को नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य मानते हैं, श्री श्री ने कहा: 'मैं पुरस्कार के लिए काम नहीं करता। वे मेरे जैसे कई हैं, और उनमें से अधिकांश इस पुरस्कार के योग्य हैं।'

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