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जुवेनाइल जस्टिस बिल 2015: वो सब कुछ जिसे आप जानना चाहेंगे

 Written By: India TV News Desk
 Published : Dec 22, 2015 11:00 am IST,  Updated : Dec 22, 2015 11:17 am IST

निर्भया गैंगरेप के नाबालिग आरोपी की रिहाई को लेकर उपजे जन आक्रोश को देखते हुए अब देश के सांसदों पर भी जुवेनाइल जस्टिस बिल को लेकर दबाव बढ़ गया है।

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जुवेनाइल के नए कानून में क्या?

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2000 के मौजूदा कानून में ऐसे मामलों में एक प्रेमवर्क तैयार करता है जिसमें ऐसे बाल अपराधी शामिल होते हैं जिन्हें कानूनी संरक्षण की दरकार होती है। नया बिल साल 2000 के कानून की जगह लेगा और इसमें दोनों श्रेणी के बच्चों के लिए जरूरी प्रक्रिया को शामिल किया जाएगा। इस नए कानून के तहत उन दोनों निकायों पर प्रकाश डाला गया है जो इन दोनों श्रेणियों के बच्चों से जुड़े मामले की देखभाल करेंगे। इन दोनों निकायों की स्थापना हर जिले में की जाएगी: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबीएस) और चाइल्ड वेलफेयर कमिटि (सीडब्ल्यूसीएस)। ये दोनों निकाय मामले से संबंधित प्रक्रियागत सारी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ साथ यह भी बताएंगे कि कानून के तहत क्या-क्या सजा दी जा सकती है। यह बिल 16 से 18 साल के उन बच्चों के संबंध में है जिन्हें जघन्य अपराध होने पर वयस्कता की श्रेणी में माना जाएगा। इस बिल के तहत तीन तरह के अपराध वर्गीकृत किए गए हैं:

  • जघन्य अपराध एक ऐसी श्रेणी का अपराध माना जाएगा जिसमें आरोपी को किसी भी कानून के तहत कम से कम सात साल की जेल का प्रावधान होगा।
  • गंभीर अपराध की श्रेणी में आरोपी को कम से कम 3 से 7 साल जेल की सजा में भेजा जा सकता है।
  • वहीं छोटे अपराध में आरोपी को कम से कम तीन साल की सजा हो सकती है।
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