नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप के नाबालिग आरोपी की रिहाई को लेकर उपजे जन आक्रोश को देखते हुए अब देश के सांसदों पर भी जुवेनाइल जस्टिस बिल को लेकर दबाव बढ़ गया है। केंद्र सरकार इस बिल को आज राज्यसभा में पेश करेगी। वहीं लगभग सभी पार्टियां इस बिल पर सदन में चर्चा के लिए तैयार हो गई हैं। आपको बता दें कि हाल ही में निर्भया मामले के नाबालिग आरोपी को रिहा कर दिया गया था। इस फैसले को लेकर निर्भया के मां-बाप समेत काफी सारे लोगों ने दिल्ली के जंतर-मंतर और इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद पुलिस को बल पूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों को गिरफ्तार करना पड़ा था, गिरफ्तार होने वाले लोगों में निर्भया के माता-पिता भी शामिल थे। इस फैसले के बाद निर्भया की मां का कहना था कि उनकी तीन साल की मेहनत बेकार गई और सरकार ने उन्हें न्याय नहीं दिया।
वहीं निर्भया की मां ने हिम्मत न हारते हुए पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद से मुलाकात कर उनके गुहार लगाई थी कि वो राज्यसभा में नए बिल को पास कराने की कोशिश करें। गौरतलब है कि नए बिल में यह संशोधन होना है कि जघन्य अपराध करने वाले 16 से 18 साल के बच्चों को उनके अपराध के आधार पर वयक्त माना जाए। जुवेनाइल जस्टिस बिल 2015 फिलहाल राज्यसभा में लंबित पड़ा है। यह बिल लोकसभा में पास हो चुका है।
कौन है जुवेनाइल और उसके लिए क्या है कानून-
18 साल से कम उम्र के अपराधियों को जुवेनाइल की श्रेणी में रखा जाता है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) यह बताती है कि किसी पर भी किसी अपराध का आरोप भी तब तक नहीं लगाया जा सकता जब तक कि वो 7 साल का नहीं हो जाता। केंद्र सरकार ने लोकसभा में साल 2014 को जुवेनाइल जस्टिस बिल पास किया था। ऐसा पाया गया कि जुवेनाइल जस्टिस कानून 2000 में कुछ प्रक्रियागत और कार्यान्वयन के लिहाज से खामियां थीं। वहीं राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक उन अपराधों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा था जिनमें शामिल लोगों की उम्र 16 से 18 साल के आसपास थी। एनसीआरबी का डेटा यह बताने के लिए काफी था कि 2003 से 2013 के बीच ऐसे अपराध में इजाफा हुआ है। इस दौरान 16 से 18 साल के बीच के अपराधियों की संख्या 54 फीसदी से बढ़कर 66 फीसदी हो गई।अगली स्लाइड में पढ़ें नए जुवेनाइल बिल में क्या है