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मणिपुर में उग्रवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी

 Written By: Bhasha
 Published : Jun 05, 2015 07:26 am IST,  Updated : Jun 05, 2015 08:54 am IST

इंफाल: मणिपुर के चंदेल जिले में सैन्य कर्मियो पर हुए हमले के बाद  क्रेंद्र सरकार ने इस हमले के पीछे शामिल उग्रवादियों का पता लगाने और उनके सफाये के लिए बड़ा अभियान शुरू किया गया।

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मणिपुर हमला: उग्रवादियों के खिलाफ कड़ा अभियान शुरु

इंफाल: मणिपुर के चंदेल जिले में सैन्य कर्मियो पर हुए हमले के बाद  क्रेंद्र सरकार ने इस हमले के पीछे शामिल उग्रवादियों का पता लगाने और उनके सफाये के लिए बड़ा अभियान शुरू किया गया। इसके साथ ही मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा बंद कर दी गई है, ताकि उग्रवादी पड़ोसी देश में नहीं भाग पाएं। 

केंद्र सरकार ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया और निर्देश दिया कि मणिपुर और नगालैंड में सुरक्षा बलों के सभी प्रतिष्ठान उग्रवादियों के हमले की किसी भी नई कोशिश को लेकर हाई अलर्ट पर रहें।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय बैठक में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर, सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग,राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोभाल सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए और उन्होंने पूर्वोत्तर राज्य में सेना के कर्मियों पर घात लगाकर किए गए हमले के बाद पैदा हालात का जायजा लिया। गृहमंत्री ने आदेश दिया कि हमले में शामिल किसी भी उग्रवादी को छोड़ा नहीं जाना चाहिए और हमले में शामिल सभी उग्रवादियों के खिलाफ कठोरतम संभव कार्रवाई होनी चाहिए।

सिंह ने निर्देश दिया कि हमले में शामिल किसी उग्रवादी को खुला नहीं घूमने देना चाहिए और इस हमले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ यथासंभव कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। रक्षा सूत्रों ने कहा कि सेना पर पिछले दो दशक में हुआ यह सबसे भयावह हमला है। सूत्रों के अनुसार, इस तरह के घात लगाकर किये गये हमले 90 के दशक के मध्य में केवल जम्मू कश्मीर में सुने जाते थे। सुरक्षा बलों का एक दल उग्रवादियों की धरपकड़ के लिए मौके पर पहुंचा। घायलों को उपचार के लिए हवाई मार्ग से नगालैंड के दीमापुर ले जाया गया।

सूत्रों ने कहा कि देश के शीर्ष सुरक्षा धड़ा इतनी बड़ी संख्या में सैन्यकर्मियों की मौत से नाराज हैं और उन्होंने फैसला किया है कि उग्रवादी समूहों पर लगाम कसने का एकमात्र तरीका बेहतर समन्वय से अभियान चलाना और सख्त से सख्त कार्रवाई करना है।

एक पुलिस अधिकारी ने यहां बताया कि 6 डोगरा रेजीमेंट का एक दल इंफाल से लगभग 80 किलोमीटर दूर तेंगनोपाल-न्यू समतल रोड पर सामान्य दिनों की तरह रोड ओपनिंग पेट्रोल 'ROP' पर था। उसी समय एक अग्यात उग्रवादी संगठन ने घात लगाकर शक्तिशाली देसी बम 'IED' से दल पर हमला कर दिया।

सेना के सूत्रों ने बताया कि आईईडी विस्फोट के बाद उग्रवादियों ने आरपीजी और स्वचालित हथियारों से सेना के चार वाहनों के काफिले पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। सेना के प्रवक्ता कर्नल रोहन आनंद ने दिल्ली में बताया, हमले में 18 सैन्यकर्मी मारे गये और 11 घायल हो गये। पहले आनंद ने मरने वालों की संख्या 20 बताई थी। पुलिस ने बताया कि एक संदिग्ध उग्रवादी भी मारा गया है। हमला सुबह नौ बजे के आसपास तब हुआ जब गश्ती दल पारालोंग और चारोंग गांवों के बीच में एक स्थान पर पहुंचा था।

मणिपुर के गृह सचिव जे सुरेश बाबू ने कहा, यह काम PLA का लगता है जिसमें KYKL संगठन की ओर से मदद मिलने का भी संदेह है। हम अभी और जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि सेना का मानना है कि हमले में KYKL का हाथ है। सेना के अनुसार हमले का स्थान भारत-म्यामां सीमा से करीब 15-20 किलोमीटर दूर है। रक्षा मंत्रालय की विग्यप्ति के अनुसार रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस कायराना कृत्य को अंजाम देने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मणिपुर में हुए आतंकवादी हमले को बेहद दुखद बताया।  मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, "मणिपुर में आज हुआ हमला बहुत ही दुखद है। देश के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले हर एक सैनिक के आगे मैं सिर झुकाता हूं।"

ताजा रपटों के मुताबिक, मणिपुर में गुरुवार को विद्रोहियों ने घात लगाकर सेना के काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में 18 सैनिक शहीद हो गए, जबकि 11 अन्य घायल हुए हैं। यह हमला पिछले एक दशक में सेना पर हुए सबसे वीभत्स हमलों में से एक है।

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