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9वीं क्लास के छात्र ने फांसी लगाई, ब्लड से लिखा सुसाइड नोट

 Written By: Mayank Bhargava
 Published : Oct 17, 2015 10:38 am IST,  Updated : Oct 17, 2015 12:55 pm IST

बैतूल: 9वीं क्लास में पढ़ रहे 14 साल के छात्र प्रखर ने पढ़ाई से परेशान आकर शुक्रवार शाम को अपने घर में ही फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। प्रखर उर्फ स्नेह ने ब्लेड से अपने

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पढ़ाई से परेशान होकर 9वीं क्लास के छात्र ने सुसाइड किया

बैतूल: 9वीं क्लास में पढ़ रहे 14 साल के छात्र प्रखर ने पढ़ाई से परेशान आकर शुक्रवार शाम को अपने घर में ही फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। प्रखर उर्फ स्नेह ने ब्लेड से अपने हाथ की नस काटकर ब्लड से सुसाइड नोट लिखा। सुसाइड नोट में प्रीबोर्ड परीक्षा में सोशल साइंस और मैथ्स में कम नंबर मिलने का जिक्र किया है।

मृतक छात्र के माता-पिता भोपाल में अपने किसी परिजन की अंत्येष्टि में भाग लेने गए थे। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली टीआई पंकज त्यागी, गंज चौकी प्रभारी एसएस यादव, एएसआई बीपी रम्हारिया मौके पर पहुंची। जहां से शव के साथ ही सुसाइट नोट बरामद किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पढ़ाई से परेशान 14 साल के एक लड़के ने खून से चिट्ठी लखी, उसने लिखा है मां...मैं मरने जा रहा हूं।

 
माँ-पिताजी,
मैं आज मरने जा रहा हू... क्योंकि मैंने आपको बहुत परेशान किया है...आपके पैसे बर्बाद कर रहा हूं... पिताजी मेरे जाने के बाद आप मम्मी पर हाथ मत उठाना ये मेरी इच्छा है। विक्की भैया को नेवी आफिसर बनाना।
सुपुत्र / कुपुत्र / स्नेह
मेरी पढ़ाई के पैसो से शीतल और शुभम को खूब पढ़ाना
प्यारी माँ

प्रखर की छोटी बहन अनामिका ने बताया कि, 14 साल की उम्र में हॉकी का सिर्फ स्कूल में नहीं, शहर का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी था, लेकिन परीक्षा में कम नंबर ने उसे तोड़कर कर रख दिया। चिट्टी में प्रखर ने प्रीबोर्ड परीक्षा में गणित और सोशल साइंस में कम नंबर मिलने पर उसे लगने लगा जिंदगी में अब सांसों का कोई अर्थ नही । मां बाप घर से बाहर थे, भोपाल से लौट पाते, उससे पहले प्रखर की परीक्षा का परिणाम आ गय। जिसमें लिखा था सोशल साइंस में 26 और गणित में 41।

9वी क्लास के प्रखर की तस्वीर धुंधली कर देने के बाद भी विचलित कर देती है। लेकिन इसे देखना जरूरी है इसलिए कि आप समझ सकें कि हमारे बच्चे किस दौर से गुजर रहे हैं।

किन परिस्थितियों में प्रखर ने मर जाने का इरादा किया होगा ? ये जांच का विषय है लेकिन चिट्टी से पता चलता है, मां बाप कितनी सख्ती करते होंगे, बेहतरी के नाम पर कि पढ़ाई के लिए पैसा उसे बर्बाद नजर आने लगा था। रोज घर में मां बाप को लड़ते हुए देख रहा था और एक दिन प्रखर ने सोच लिया उसके घर में होने का अब कोई बड़ा अर्थ नहीं बचा है।

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