
कब से चली आ रही है यह परम्परा
गछवाहों में यह परम्परा कब से चली आ रही है इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। अधिकतर गछवाहों का कहना है कि वह इस परम्परा के बारे में अपने पूर्वजों से सुनते आ रहे हैं। वैसे हिन्दू धर्म में किसी महिला द्वारा अपने सुहाग चिन्ह को छोडना अपशगुन माना जाता है लेकिन गछवाहों में इसे शुभ माना जाता है।
यहां प्रसाद के रूप में दिया जाता है बकरे का मांस
पूर्वी उत्तर प्रदेश में तरकुलहा देवी का मंदिर देवरिया से 30 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में चौरा चौरी के समीप है। मंदिर में माह चैत्र से लेकर वैशाख महीने तक एक माह का मेला लगता है जहां दूर दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। नवरात्र के दिनों में यहां भक्तों की काफी भीड होती है। देश का संभवत: पहला मंदिर है जहां प्रसाद के रूप में पशुबलि देकर माता को प्रसन्न किया जाता है। मान्यता है कि मंदिर क्षेत्र में भक्तगण बकरे का मांस पकाकर प्रसाद के तौर उसका सेवन करते हैं।