नई दिल्ली: छह चुनावी ट्रस्टों ने वित्त वर्ष 2014-15 में 19 राजनीतिक दलों को कुल 177.40 करोड़ रुपए का चंदा दिया, जिसमें भाजपा को सर्वाधिक 111.35 करोड़ रुपए का चंदा मिला। एक नई रिपोर्ट में यह खुलासे किए गए। गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने कहा कि चुनावी ट्रस्टों को कॉरपोरेट जगत और अलग अलग लोगों से 177.55 करोड़ रुपए की कुल धनराशि मिली और उन्होंने राजनीतिक दलों में 177.40 करोड़ (99.92 प्रतिशत) की धनराशि बांटी।
भाजपा, कांग्रेस, राकांपा और माकपा को वित्त वर्ष 2014-15 में छह चुनावी ट्रस्टों से पैसे मिले। भाजपा को तीन चुनावी ट्रस्टों से सबसे अधिक कुल 111.35 करोड़ रुपए मिले, इसके बाद राकांपा को तीन ट्रस्टों से सबसे ज्यादा कुल 31.65 करोड़ रुपए मिले। माकपा को वित्त वर्ष 2014-15 में ट्रॉयम्फ एलेक्टरल ट्रस्ट से कुल 2.35 लाख रुपए मिले लेकिन पार्टी ने चुनाव आयोग को दी गई अपनी चंदे से संबंधित रिपोर्ट में इसकी घोषणा नहीं की। सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार चुनावी ट्रस्टों के लिए एक वित्त वर्ष में अपनी कुल आय का 95 प्रतिशत हिस्सा पंजीकृत राजनीतिक दलों को चंदे में देना जरूरी है।
चुनावी ट्रस्टों का एकमात्र उद्देश्य पंजीकृत राजनीतिक दलों को पारदर्शी तरीके से पैसे उपलब्ध कराना है। सत्य एलेक्टरल ट्रस्ट को सबसे अधिक 141.78 करोड़ रुपए मिले जबकि प्रोग्रेसिव एलेक्टरल ट्रस्ट को 25.14 करोड़ रुपए, जनप्रगति एलेक्टरल ट्रस्ट को 4.02 करोड़ रुपए, बजाज एलेक्टरल ट्रस्ट को 3.05 करोड़ रुपए, ट्रायम्फ एलेक्टरल ट्रस्ट को 3.028 करोड़ रुपए और समाज एलेक्टरल ट्रस्ट को 0.525 करोड़ रुपए मिले। छह चुनावी ट्रस्टों ने 15 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों को भी चंदा दिया, जिनमें बीजद, इनेलोद और आप सहित अन्य शामिल हैं।
चुनावी ट्रस्टों ने क्षेत्रीय दलों को कुल 27.58 करोड़ रुपए दिए। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने सत्य एलेक्टरल ट्रस्ट को सबसे ज्यादा 40 करोड़ रुपए की धनराशि दी जो ट्रस्ट के कुल चंदे का 22.53 प्रतिशत था। इसके बाद डीएलएफ ने ट्रस्ट को 25.01 करोड़ रपए (कुल चंदे का 14.08 प्रतिशत) दिए। टाटा स्टील ने प्रोग्रेसिव एलेक्टरल ट्रस्ट को 14.134 करोड़ रुपए की धनराशि दी जो उसके कुल चंदे का 56.19 प्रतिशत था। इसके बाद ट्रस्ट को टाटा सन्स ने सबसे ज्यादा 4.74 करोड़ रुपए (कुल चंदे का 18.85 प्रतिशत) दिए।