पुत्र के लिए पिता क्या करे-
बुद्धिमान व्यक्ति अपने बच्चों को शुभ कार्य में लगाता है ताकि उनका बच्चा श्रेष्ठ और शीलवान पैदा हो। वहीं चाणक्य का कहना था कि जो माता-पिता अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते हैं वो शत्रु से कम नहीं होते। इस तरह के माहौल में बड़े हुए बच्चे ठीक उसी तरह शोभायमान नहीं होते जैसे हंसों के बीच में बगुला अच्छा नहीं लगता।
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चाणक्य नीति: पिता को अपने पुत्र को ज्यादा लाड़ नहीं करना चाहिए
नई दिल्ली: पति-पत्नी, शत्रु-मित्र और गुरू-शिष्य के संबंधों पर अपनी तार्किक और दमदार बात रखने वाले आचार्य चाणक्य ने अच्छे और खराब पुत्रों की विशेषता पर भी अपनी राय रखी है। चाणक्य कहते थे कि
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