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चाणक्य नीति: पिता को अपने पुत्र को ज्यादा लाड़ नहीं करना चाहिए

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 07, 2015 08:24 am IST,  Updated : Jul 07, 2015 08:27 am IST

नई दिल्ली: पति-पत्नी, शत्रु-मित्र और गुरू-शिष्य के संबंधों पर अपनी तार्किक और दमदार बात रखने वाले आचार्य चाणक्य ने अच्छे और खराब पुत्रों की विशेषता पर भी अपनी राय रखी है। चाणक्य कहते थे कि

chanakyaपुत्र सपुत्र भी और कपुत्र भी-
प्रिय शिष्य और पुत्र को ज्यादा लाड़ नहीं करना चाहिए क्योंकि ज्यादा लाड़ करने से वो दुष्ट और धमकाने से सोने के समान उज्जवल संत बन जाते हैं। वहीं सुपुत्र और कुपुत्र पर अपनी बात रखते हुए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सुपुत्र और सुगंध वाले वृक्ष की एक ही दशा होती है, जिस प्रकार एक सुगंधित वृक्ष अपनी गंध से सारे वन को सुगंधित कर देता है उसी प्रकार एक सुपुत्र सारे कुल को प्रसिद्ध कर देता है।  

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