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चाणक्य नीति: पिता को अपने पुत्र को ज्यादा लाड़ नहीं करना चाहिए

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 07, 2015 08:24 am IST,  Updated : Jul 07, 2015 08:27 am IST

नई दिल्ली: पति-पत्नी, शत्रु-मित्र और गुरू-शिष्य के संबंधों पर अपनी तार्किक और दमदार बात रखने वाले आचार्य चाणक्य ने अच्छे और खराब पुत्रों की विशेषता पर भी अपनी राय रखी है। चाणक्य कहते थे कि

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चाणक्य नीति: पिता को अपने पुत्र को ज्यादा लाड़ नहीं करना चाहिए

नई दिल्ली: पति-पत्नी, शत्रु-मित्र और गुरू-शिष्य के संबंधों पर अपनी तार्किक और दमदार बात रखने वाले आचार्य चाणक्य ने अच्छे और खराब पुत्रों की विशेषता पर भी अपनी राय रखी है। चाणक्य कहते थे कि पुत्र से हर किसी को मोह होता है लेकिन पुत्र से मोह, प्यार-दुलार और ताड़ना की एक उम्र होती है और सही उम्र पर सही व्यवहार करना ही बच्चे को सही राह दिखाता है। तो पिता पुत्र संबंधों पर कुछ ऐसा सोचते हैं चाणक्य।

ऐसे करें बच्चों का लालन पालन-

पुत्र को पांच वर्ष तक प्रेम, फिर पांच से 10 वर्ष तक कड़ी निगरानी, और 10 से 16 तक पुत्र से साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए। इस उम्र के बाद बच्चा इतना समझदार हो जाता है कि वो अपना भला और बुरा समझने लगता है और 10 से 16 साल के बीच की उम्र में ही दुर्गुण और सद्गुण आने की संभावना ज्यादा रहती है।
अगली स्लाइड में पढ़ें क्या कहते थे चाणक्य

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