
आप दुखी हैं यह भी किसी से न बताएं-
आचार्य का कहना था कि कभी भी अपना दुख औरों के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना भी आपके लिए बेहतर नहीं होता। अगर किसी को बताते हैं कि आप फलां कारण से परेशान हैं तो ऐसा संभव है कि लोग आपकी भावनाओं को न समझें और आपकी मदद न करें। इसलिए अपने मन के दुख को अपने तक ही सीमित रखना चाहिए। ऐसा कई बार होता है कि लोग आपके दुख को लेकर आपका मखौल तक बना देते हैं। ऐसा यकीनन होता है और अगर दुख के समय में कोई ऐसा करता है तो आपकी पीड़ा कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए अपने अहम राज में मन में ही दफ्न रखें।
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