
बुरे व्यक्ति ने किया हो अपमान तो भी न बताएं-
चाणक्य का कहना था कि अगर जीवन में कभी भी कोई नीच या छोटा व्यक्ति आपका अपमान करता है, तो भी यह बात अपने तक ही सीमित रखनी चाहिए। क्योंकि उनका कहना था कि अगर इस तरह की बातें और लोगों के जेहन में जाती हैं तो उससे आपका दुख कम नहीं होता बल्कि आप उपहास के पात्र बन जाते हैं, जो आपके दुख में और इजाफा कर देता है।