
डिजीटल इंडिया के युग में केमिस्ट लॉबी की दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में हड़ताल क्यो ?
ऑनलाइन खरीद एक तरफ जहां विकल्प देता है, वहीं होम डिलिवरी और ज्यादा छूट की सुविधा भी। जाहिर है कि ऐसे में दवा दुकानदारों को अपना धंधा मंदा पड़ने की आशंका है। इंडिया में दवाओं की कंपनियों की सेल देखे तो यह विशालकाय आंकड़ा है ऐसे में अगर ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर रोक लगती है तो सरकार को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
70 हजार करोड़ का देश का दवा बाजार
दिल्ली, लखनऊ, आगरा, कानपुर, भोपाल, लुधियाना, जालंधर, चेन्नई, मुंबई, इंदौर में 10 हजार लोगों को सुविधा कूरियर से दे रहे हैं। देश में दवा बाजार 70 हजार करोड़ का है।
सरकार का पक्ष
केमिस्टों द्वारा दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में की गई हड़ताल के बाद सरकार ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दवा विक्रेताओं के संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के चेयरमैन से बात की। नड्डा ने उन्हें कहा कि सरकार ने इंटरनेट पर दवाओं की बिक्री के बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया है। इस विषय पर सभी पक्षों से सुझाव सुनने के बाद ही सरकार कोई फैसला लेगी।
इंटरनेट पर दवाओं की बिक्री को लेकर ड्रग कंट्रोलर की तरफ से जनता से सुझाव मांगे गए हैं। इस महीने 31 अक्टूबर तक सुझाव देने की समय सीमा रखी गई है। सरकार को इसके समर्थन और विरोध में लगातार सुझाव मिल रहे हैं।
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