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Video: वसुंधरा के राज में 6 बालिका वधू, गोद में उठाकर हो रहा है बच्चों का विवाह

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 19, 2016 08:23 pm IST,  Updated : Apr 19, 2016 08:23 pm IST

जयपुर: जिन बच्चों के खेलने कूदने की उम्र है उनकी शादियां हो रही हैं, जो मासूम बच्चे खुद अपने पैरों पर खड़े तक नहीं हो सकते और अभी ठीक से चल नहीं सकते, उन्हें दूल्हा

child marriage- India TV Hindi
child marriage Image Source : INDIA TV

जयपुर: जिन बच्चों के खेलने कूदने की उम्र है उनकी शादियां हो रही हैं, जो मासूम बच्चे खुद अपने पैरों पर खड़े तक नहीं हो सकते और अभी ठीक से चल नहीं सकते, उन्हें दूल्हा और दुल्हन बनाया जा रहा है। ये शर्मसार करने वाली हकीकत है राजस्थान के उन जिलों की जहां पिछले 2 दिनों के दौरान 6 बाल विवाह हो चुके हैं। आप उन्हीं 6 बालिका वधुओं में किसी की उम्र 5 साल है तो किसी उम्र 6 से तो कोई 8 साल की है। वसुंधरा के राज में बाल विवाह की ये बाल विवाह की ये घटनाएं राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से आई हैं, जहां आज भी बाल विवाह परंपरा जिंदा है। कानून को तोड़कर छोटी-छोटी बच्चियों की शादी कराई गई।

21वीं सदी का शर्मनाक सच

ये घटनाएं 21 वीं सदी के हिन्दुस्तान की सोच पर किसी कलंक से कम नहीं है। बाल विवाह कानून की खुलेआम धज्जियां शनिवार रात को उड़ाई गई। चितौड़गढ़ के गंगरार के जयसिंहपुरा गांव में ये विवाह हुए। राजस्थान के ज्यादातर जिलों में इस तरह के बाल विवाह हर साल होते हैं खासकर चितौड़गढ़, अजमेर, नागौर, दौसा, भरतपुर में ये तादाद ज्यादा है। इन बाल विवाहों को करवाने के लिए दिन भी तय है। राजस्थान में अक्षय तृतीया को बाल विवाह के लिए बेहद शुभ दिन माना जाता है। लेकिन पुलिस प्रशासन की थोड़ी बहुत सख्ती की वजह से अब होली के बाद किसी भी विवाह मूहर्तों में ये शादियां करवाई जाती हैं।

क्या कहता है कानून ?

  • देश में ऐसे बाल विवाह को रोकने के लिए अंग्रजों के जमाने से कानून मौजूद हैं।
  • 1929 में पहली बार बाल विवाह रोकथाम अधिनियम बना इसके बाद इस कानून में मौजूद खामियों को दूर कर 2006 में केंद्र सरकार ने बाल विवाह निषेध अधिनियम बना।
  • कानून के तहत बाल विवाह को अपराध की श्रेणी में डाला गया है इसके मुताबिक शादी के लिए लड़के की उम्र 21 और लड़की की 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए।
  • कानून के मुताबिक बाल-विवाह करवाने वाले माता-पिता, शादी में शामिल होने वाले लोगों के साथ-साथ हलवाई, पंडित, टेंट वाले सभी पर मुकदमा चल सकता है और इनपर 1 लाख रूपये जुर्माना के साथ-साथ 2 साल की जेल भी हो सकती है।

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