नई दिल्ली: भारत के हर राज्य, हर शहर और हर क्षेत्र के मंदिरों, बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों पर दिख जाने वाले भिखारी बेशक आपको फटे हाल और कम पढ़े लिखे नजर आते हों, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इनमें से अधिकांश 12वीं पास हैं। जिस देश में 10वीं भी पास न होने वाले लोग राजनीति के बड़े बड़े ओहदों पर बैठे हैं वहां 12वीं पास लोगों का भिखारी होना थोड़ा चौंकाता है। जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि हमारे देख के कुछ भिखारी 12वीं पास भी हैं वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने प्रफेशनल डिप्लोमा ले रखा है। कुछ तो ग्रेजुएट और पीजी तक की पढ़ाई भी कर चुके हैं। साल 2011 की जनगणना रिपोर्ट के आधार पर पेशेवर रुप से कोई काम न करने वाले (भीख मांगने वाले) लोगों के शैक्षणिक स्तर का आंकड़ा इस हफ्ते जारी किया गया है।
पसंद नहीं मजबूरी में बने भिखारी:
इन आंकड़ों में जो 12वीं पास और ग्रेजुएट भिखारियों का आंकड़ा सामने आया है वो अपनी पसंद नहीं बल्कि मजबूरी में भिखारी बने हैं। पढ़ने लिखने के बाद जब इन्हें अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर वाजिब और संतोषजनक नौकरी नहीं मिली तो इन्हें भिखारी बनने को मजबूर होना पडा। 12वीं पास एक कुछ लोग ऐसे भी हैं जो फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं और उन्होंने भिखारी बनना इसलिए पसंद किया क्योंकि उन्हें इसके जरिए अपने पेशे से ज्यादा कमाई हो रही थी। कुछ ऐसे भी हैं जो स्नातक करने के बाद शहर में कुछ करने का सपना पाल कर आए थे, कुछ राज मिस्ती बन गए तो कुछ कोई और लेकिन जीतोड़ मेहनत करने के बाद भी उन्हें बेहतर और सम्मानजनक पैसा नहीं मिल रहा था लिहाजा उन्हें भिखारी बनना पड़ा। बीकॉम, एमकॉम और न जाने कौन कौन सी डिग्रियां लिए हुए लोग ऐसा करने को मजबूर हैं।