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दुनिया से नेपाल पहुंच रही मदद, मृतकों की संख्या 2,300 हुई

 Written By: IANS
 Published : Apr 26, 2015 07:05 pm IST,  Updated : Apr 26, 2015 07:21 pm IST

काठमांडू: हिमालय की गोद में बसा नेपाल अभी शनिवार को आए भीषण जलजले से उबर नहीं पाया था कि रविवार को एक बार फिर आए 6.9 तीव्रता के भूकंप के झटकों ने स्थिति को और

नेपाल भूकंप में...- India TV Hindi
नेपाल भूकंप में मृतकों की संख्या 2300 हुई

काठमांडू: हिमालय की गोद में बसा नेपाल अभी शनिवार को आए भीषण जलजले से उबर नहीं पाया था कि रविवार को एक बार फिर आए 6.9 तीव्रता के भूकंप के झटकों ने स्थिति को और भयावह बना दिया। शनिवार को आए 7.9 तीव्रता के भूकंप से मची तबाही में अब तक 2,300 लोगों की मौत हो चुकी है, तथा दसियों हजार लोगों को मजबूरन रात सड़कों पर गुजारनी पड़ी।

काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने रविवार को बताया कि शनिवार को आए भूकंप से 66 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

वहीं नेपाल के पर्यटन मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक माउंट एवरेस्ट पर हिमस्खलन से 18 पर्वतारोहियों की मौत हो गई है, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

इस बीच पूरी दुनिया से नेपाल के लिए आपदा राहत पहुंचने लगी है और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूकंप पर एक उच्चस्तरीय बैठक की और कहा, "मैं समझ सकता हूं कि नेपालवासी इस समय किस मनोदशा से गुजर रहे हैं..नेपाल के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों हम आपके साथ हैं।"

गृह मंत्रालय के अनुसार, भूकंप में मरने वालों की संख्या 2,309 तक पहुंच गई है, जबकि 5,805 अन्य के घायल होने की खबर है। 1934 के बाद नेपाल में आई यह सबसे विनाशकारी भूकंप है।

अतिरिक्त नुकसान के डर और परेशानी के बीच काठमांडू में रहने वाले सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर रात बिताई। लोगों ने प्लास्टिक शीट पर और कार्डबोर्ड पर कंबल में रात गुजारी।

अस्पताल में जख्मी लोगों के पहुंचने का तांता लगा हुआ है तथा चिकित्सक और नर्स लगातार उनके उपचार में लगे हुए हैं।

गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक, अकेले काठमांडू में 723 लोग मारे गए हैं, जबकि राजधानी से 13 किलोमीटर दूर भक्तपुर में 205 लोगों की मौत हुई है। राजधानी से पांच किलोमीटर दूर ललितपुर में 125 लोग मारे गए हैं।

मरने वालों में दो विदेशी और दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। बयान में चेताया गया है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।

इस आपदा में 4,600 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

नेपाली मीडिया की रपट के मुताबिक, सिंधुपालचौक जिले में 80 लोगों की मौत हुई है।

सरकार ने इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है और क्षतिग्रस्त अवसंचनाओं के पुनर्निर्माण के लिए 50 करोड़ नेपाली रुपये का कोष बनाने की घोषणा की गई है।

नेपाल के समाचार पत्र कांतीपुर डेली के मुताबिक, पूरे दिन आने वाले झटकों में बसंतपुर दरबार स्थित 80 फीसदी मंदिर तबाह हो चुके हैं।

धरहरा में मीनार के मलबे में से करीब दो दर्जन शव बरामद हुए हैं। 83 साल पहले इसी प्रकार के एक भूकंप में धरहरा कई भागों में टूट गई थी।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, "मानूसन के तेजी से आने की वजह से राहत और बचाव अभियानों में बाधा आ सकती है।"

संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कॉर्डिनेटर जैमी मैकगोलड्रिक ने कहा, "हम इस दुखद त्रासदी में नेपाल सरकार का सहयोग करने को तैयार हैं।"

उन्होंने कहा, "यह जरूरी है कि हम तीव्र और प्रभावी कदम उठाएं। हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि आगे किसी की मौत न हो और अधिक जरूरतमंदों की मदद करने को प्राथमिकता दी जाए।"

राष्ट्रपति राम बरन यादव के कार्यालय-सह-निवास में दरारें पड़ गईं, जिसकी वजह से उन्होंने शनिवार रात एक शिविर में बिताई।

राष्ट्रपति कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि यादव और उनके सुरक्षाकर्मियों ने पूरी रात शिविर में बिताई।

एक अधिकारी ने कहा, "राष्ट्रपति यादव अभी भी अपने शिविर में हैं।"

प्रधानमंत्री निवास का मुख्य द्वार क्षतिग्रस्त हो गया है, जिस समय देश में भूकंप आया, प्रधानमंत्री सुशील कोईराला इंडोनेशिया में थे।

इस बीच भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल की मदद के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।

मोदी ने कहा, "मैंने कच्छ भूकंप को निकट से देखा है। यह आपदा कितनी भयानक हो सकती है, उसकी कल्पना कर सकता हूं। नेपाल के भाइयों बहनों आपकी मदद के लिए भारत हमेशा आपके साथ है।"

उन्होंने कहा, "सबसे पहला काम है राहत कार्य, लोगों को बचाना, एक्सपर्ट लोगों की टीम भेजी गई है। इस आपदा के समय हर नेपाली के आंसू भी पोछेंगे, उनका साथ भी देंगे। उन लोगों का दुख भी हमारा दुख है। मलबे के नीचे जो जीवित दबे हैं उन्हें जिंदा बाहर निकालना पहला काम है। सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए नेपाल अपना है।"

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