जालंधर: जालंधर जिले के नूरमहल इलाके में स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज को क्लिनिकली डेड घोषित किए जाने के बाद उन्हें 2 साल से संस्थान के एक कमरे में फ्रीजर में रखा गया है। हालांकि, उनके अनुयायियों का मानना है कि वह समाधि में हैं और एक दिन जरूर जागृत होकर लोगों के सामने आएंगे।
संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की मौत के बारे में आज के ही दिन 2 साल पहले चर्चा हुई थी। इसके बाद नूरमहल स्थित आश्रम में श्रद्धालुओं और अनुयायिओं के आने जाने का तातां लग गया था। श्रद्धालुओं का मानना है कि महाराज समाधि में हैं और वह एक दिन आकर अपने भक्तों को जरूर दर्शन देंगे। इससे पहले यह मामला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में भी पहुंच चुका है। अदालत की एकल पीठ ने पंजाब सरकार को आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार करने का आदेश दिया था। बाद में हालांकि, अदालत ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी।
इसके बाद पिछले साल सितंबर में अदालत ने मौखिक तौर पर कहा कि इस मामले में सभी पक्षों को मिल बैठकर अंतिम फैसला करना चाहिए क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट में महाराज को क्लिनिकली डेड बताया गया है। मामले में अगली सुनवायी फरवरी में होनी है। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का भी यही कहना है। संस्थान का दावा है कि महाराज समाधि में लीन हैं और वह वापस आयेंगे।
संस्थान के प्रवक्ता स्वामी विशालानंद ने बातचीत में कहा कि महाराज समाधि में है। वह उठ कर सामने आयेंगे। अपने अनुयायियों को दर्शन भी देंगे लेकिन कब आयेंगे इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। विशालानंद ने दावा किया कि महाराज ने समाधि में जाने से पहले बताया था कि वह लंबी समाधि में जा रहे हैं। इसके बाद वह जागृत अवस्था में आयेंगे। हालांकि, आने के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा था। ऐसे भी इस तरह की समाधि कोई नई बात नहीं है। रामकृष्ण परमहंस और आदि गुरू शंकराचार्य भी समाधि में जा कर वापस आये हैं।