नई दिल्ली: सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से शुक्रवार को कहा कि इस समय ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत 15 साल से पुराने और बीएस 1 या बीएस 2 मानकों का पालन करने वाले डीजल वाहन सड़कों से हटाए जा सके। भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय ने कहा कि 18 और 20 जुलाई को अधिकरण द्वारा दिया गया आदेश मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है। आदेश में दिल्ली सरकार को शहर में चल रहे दस साल से पुराने सभी डीजल वाहनों का पंजीकरण रद्द करने का निर्देश दिया गया था।
मंत्रालय ने एनजीटी में दायर अपने शपथपत्र में कहा, इस समय ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जिसके तहत 15 साल से पुराने और बीएस 1 या बीएस 2 मानकों का पालन करने वाले डीजल वाहन सड़कों से हटाए जा सके। इसमें कहा गया कि वाहनों को जबरदस्ती हटाए जाने के बाद प्रभावित लोग मुकदमे दायर कर सकते हैं और इस तरह के आदेश का मतलब कानून का पालन करने वाले मोटर वाहन मालिकों को दंडित करना होगा।
हलफनामे में कहा गया कि मुकदमों से अदालतों का कीमती समय बर्बाद होगा। इसमें कहा गया, जिन मोटर वाहनों के पंजीकरण रद्द करने के आदेश दिए गए हैं उनसे मोटर वाहन अधिनियम, 1988 जिसे 2015 में संशोधित किया गया, उसके किसी प्रावधान का या उसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। मंत्रालय का प्रतिनिधित्व कर रहीं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद दो अगस्त को अधिकरण के सामने मामले में बहस करेंगी।