
ब्रेनवॉश - पाकिस्तान के तमाम शहरों से आए लड़कों को भारत के खिलाफ भड़काऊ भाषण और वीडियो दिखाया जाता है। कोशिश ये होती है कि जेहाद के नाम पर इन लड़कों को इतना भड़का दिया जाए कि वो कुछ भी कर सकें।
शारीरिक ट्रेनिंग - ट्रेनिंग का दूसरा हिस्सा होता है शारीरिक ट्रेनिंग। पीओके के ट्रेनिंग कैंपों में 700 से 800 लड़के एक साथ ये ट्रेनिंग करते हैं। कोशिश ये कि उनके शरीर की ताकत बढ़ाई जाए।
दिमागी ट्रेनिंग - इस हिस्से में नौजवान लड़कों को बर्दाश्त करने की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें कई दिनों तक भूखे रहना होता है। बिना खिलाए-पिलाए उन्हें कई किलोमीटर तक दौड़ाया जाता है। मकसद ये कि जब वो आतंकी हमला करें तो हर हालात का सामना कर सकें।
कमांडो ट्रेनिंग - इस हिस्से में लड़कों को छापामार लड़ाई, बम, ग्रेनेड, मैप रीडिंग और टेलीफोनी के बारे में सिखाया जाता है। खासतौर पर भारत के मौसम, हिंदी भाषा और खान-पान के बारे में जानकारी दी जाती है।
अगली स्लाइड में जानें आतंकी ट्रेनिंग चरणों के पूरा होने के बाद क्या होता है...........