नई दिल्ली: भारत ने तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से आज कहा कि उसे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की मदद के लिये कच्चे तेल का मूल्य तर्कसंगत और जवाबदेह रखना चाहिये। दुनिया में कच्चे तेल के कुल उत्पादन में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इस संगठन ने हालांकि, कहा है कि कच्चे तेल के दाम एक साल के भीतर बढ़ेंगे। फिलहाल ये दाम पिछले 11 साल के निम्न स्तर तक गिर गये हैं।
दुनिया के चौथे सबसे बड़े तेल आयातक देश भारत तथा ओपेक के बीच पहली संस्थागत वार्ता में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने एक आयातक देश के दृष्टिकोण को पेश किया और खरीदार-विक्रेता संबंधों से आगे बढ़कर अधिक भागीदारी वाले सहयोग की अपेक्षा की।
भारत-ओपेक वार्ता के तहत ओपेक के महासचिव अब्दुल्ला अल-बादरी के साथ बैठक के बाद प्रधान ने कहा, कुल तेल आयात का करीब 85 प्रतिशत तथा गैस का 95 प्रतिशत आयात ओपेक देशों से होता है। तेल कीमतों के निर्धारण और उपलब्धता के मामले में ओपेक की बड़ी भूमिका है।
ओपेक इस प्रकार की वार्ता अमेरिका, यूरोपीय संघ, रूस तथा चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देशों के साथ करता है। भारत के साथ यह पहली संस्थागत वार्ता है। उन्होंने कहा, हमने उन्हें एक प्रमुख खरीददार तथा बाजार के दृष्टिकोण के बारे में बताया। हमारा मानना है कि विश्व अर्थव्यवस्था के लिये वाजिब और जवाबदेह मूल्य बेहतर होगा। अल-बादरी ने भी कहा कि ओपेक भी वाजिब मूल्य पर गौर करता रहा है।