नई दिल्ली: जिसे आज तक दुनिया गुड़गांव के नाम से जानती थी अब इस शहर का नाम बदल गया है अब इस शहर को गुरुग्राम नाम से जाना जाएगा। कहते हैं हजारों साल पहले गुड़गांव का नाम गुरुग्राम ही था। आखिर इस हाईटेक शहर को गुरुग्राम क्यों कहा जाता था ? आखिर क्या है इस शहर का अतीत ? क्या हैं वो कहानियां, वो किंवदंतियां जिनके हवाले से इस शहर का नाम गुड़गांव से बदलकर गुरुग्राम रख दिया गया ?
ऊंची-ऊंची इमारतें, मल्टीनेशनल कंपनियों के आलीशान दफ्तर, मॉल्स, फ्लाईओवर, चौड़ी सड़कें, भागती दौड़ती गाड़ियां और चमकते दमकते चेहरे गुड़गांव की मॉडर्न तस्वीर देखकर कौन सोच सकता है कि इस शहर में कभी द्रोणाचार्य, अर्जुन, एकलव्य जैसे पौराणिक किरदारों का बसेरा था। कौन यकीन करेगा कि कभी इसे गुरुग्राम कहा जाता था लेकिन मान्यता ऐसी ही है।
साइबर सिटी गुड़गांव क्यों बना गुरुग्राम ?
गुड़गांव के गुरुग्राम होने की इस पड़ताल के दौरान बड़ी दिलचस्प जानकारियां मिली पता चला कि महाभारत काल में पांडव और कौरवों को धनुर्विद्या की सीख देने वाले गुरु द्रोणाचार्य का गांव यहीं है।
- गुड़गांव ही वो जगह है जहां अर्जुन ने चिड़िया की आंख में निशाना लगाया था
- यहीं पर द्रोणाचार्य ने एकलव्य से अंगूठा मांगा था ताकि वो धनुर्विद्या में अर्जुन का मुकाबला न कर सके
- यहां तक कि कुरुक्षेत्र में होनेवाले महाभारत के युद्ध की तैयारी भी गुड़गांव में ही हुई थी
द्रोणाचार्य का मंदिर ही नहीं, गुड़गांव में और भी कई जगहें हैं और भी कई निशानियां हैं जो बताती हैं कि गुरु द्रोणाचार्य के साथ गुड़गांव का कुछ कनेक्शन तो जरूर था। मिसाल के तौर गुड़गांव का एक मेट्रो स्टेशन जिसका नाम ही गुरु द्रोणाचार्य मेट्रो स्टेशन रखा गया है। दिल्ली की मेट्रो ट्रेन की तर्ज पर साइबर सिटी गुड़गांव में भी मेट्रो ट्रेन का नेटवर्क है लेकिन ये गुड़गांव की अपनी मेट्रो है जो दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन से जुड़ती है।
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