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इंदौर: अस्पताल में ऑक्सीजन की जगह एनेस्थेसिया दिया, बच्चे की मौत

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 29, 2016 02:40 pm IST,  Updated : May 29, 2016 02:40 pm IST

2 बच्चों को आक्सीजन की जगह एनेस्थेसिया- नाइट्रस ऑक्साइड (बेहोश करने वाली) गैस दे दी गई, जिससे एक बच्चे की मौत हो गई और दूसरे की हालत गंभीर है।

indore hospital- India TV Hindi
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इंदौर: मध्य प्रदेश में इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंत (MY) अस्पताल में ऑपरेशन के वक्त गंभीर लापरवाही के मामले सामने आए हैं। 2 बच्चों को आक्सीजन की जगह एनेस्थेसिया- नाइट्रस ऑक्साइड (बेहोश करने वाली) गैस दे दी गई, जिससे एक बच्चे की मौत हो गई और दूसरे की हालत गंभीर है। अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर गैस पाइप लाइन बिछाने वाले ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने रविवार को बताया कि बीते दो दिनों (शुक्रवार और शनिवार) के दौरान एम.वाई अस्पताल के नव निर्मित 'मॉड्यूलर पेडियाट्रिक ओटी' में दो बच्चों के ऑपरेशन हुए। इनमें से एक बच्चे की मौत हो गई है, जबकि दूसरा गंभीर हालत में है।

खंडवा निवासी गणेश के 8 वर्षीय बेटे आयुष को शुक्रवार को ऑपरेशन थिएटर में ऑपरेशन से पहले ऑक्सीजन का मास्क लगाया गया। लेकिन ऑपरेशन के दौरान ही उसकी मौत हो गई। इसी तरह शनिवार को जावरा निवासी बालाराम के डेढ़ वर्षीय बेटे राजवीर की भी ऑपरेशन के दौरान हालत बिगड़ गई और अब वह वेंटिलेटर पर है।

संयोगितागंज थाना के प्रभारी ओ.एस.भदौरिया ने आईएएनएस से बताया कि ऑपरेशन थिएटर (OT) में बच्चों को ऑक्सीजन के स्थान पर बेहोश करने वाली गैस (नाइट्रस ऑक्साइड) दी गई। अस्पताल प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत पर ऑपरेशन थिएटर में पाइप लाइन बिछाने वाले ठेकेदार राजेंद्र चौधरी को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ लापरवाही और गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

अस्पताल के प्रभारी डा. सुमित शुक्ला ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में माना कि पाइपलाइन से ऑपरेशन थिएटर में ऑक्सीजन गैस आती है। लेकिन जांच में पता चला है कि ऑक्सीजन और नाइट्रस ऑक्साइड गैस की पाइपलाइन में बदलाव हुआ था। इससे बच्चों की तबियत बिगड़ी। ओटी को सील कर दिया गया है और प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

सूत्रों ने बताया कि हाल में बने ऑपरेशन थिएटर की छत से नीचे की ओर गैस की दो पाइप लाइनें लाई गई हैं। दोनों पाइप लाइनों के रंग अलग-अलग हैं। नीले रंग की पाइप से नाइट्रस और सफेद पाइप से ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है। ये दोनों रंगहीन और गंधहीन गैस होती हैं। पाइप का रंग देखकर ही मरीज को गैस दी जाती है। लेकिन सफेद पाइप में ऑक्सीजन के स्थान पर नाइट्रस गैस आई और बच्चों की जिंदगी मुश्किल में पड़ गई।

इस पूरे मामले की जांच अस्पताल प्रशासन भी अपने स्तर से कर रहा है। उधर ठेकेदार चौधरी खुद को बेकसूर मानते हैं। उनका कहना कहना है कि पाइप लाइन बिछाना उनका काम था, लेकिन गैस की आपूर्ति तो अस्पताल प्रशासन सुनिश्चित करता है।

एम.वाई अस्पताल में गंभीर लापरवाही सामने आने पर कांग्रेस विधायक जीते पटवारी ने प्रबंधन व प्रशासन पर निशाना साधते हुए दोषी पर पर कार्रवाई की मांग की।

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