द्रास (जम्मू कश्मीर): सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को कहा कि जम्मू कश्मीर में आईएसआईएस की कोई बड़ी आहट नहीं है लेकिन संगठन ‘इस तरफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है’ और सुरक्षा ग्रिड को इस ‘खतरनाक’ संगठन को देश में पांव पसारने से रोकना होगा।
उत्तरी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कई युवकों के आतंकवाद में शामिल होने पर भी चिंता जताई, लेकिन कहा कि यह संख्या इतनी बड़ी नहीं है कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को बदल सके।
यहां युद्ध स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित करने और 1999 के करगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उन्होंने कहा, ‘जम्मू कश्मीर में आईएसआईएस की कोई बड़ी आहट नहीं है। हां, हमने झंडा लहराने की घटनाएं देखी हैं।’
उन्होंने कहा, ‘यह चिंता का विषय है, हां यह है। क्योंकि आईएसआईएस एक ऐसी कट्टरपंथी विचारधारा और विचारों का संगठन है जिसके बारे में हमें सुनिश्चित करना होगा कि यह कोई प्रभाव स्थािपत न कर पाए और लोकतंत्र में इसकी कोई जगह नहीं है।’
हुड्डा ने कहा, ‘और इसलिए, हमारे लिए यह विचार करने का कारण है कि इस वैचिारिक युद्ध से कैसे लड़ा जाए और स्पष्टत: यह योजना है जिसके जरिए इससे लड़ा जाएगा। इसलिए हमारे लिए जो सुरक्षा से संबद्ध हैं और जो शासन से जुड़े हैं, हर किसी को एकजुट होना होगा तथा सुनिश्चित करना होगा कि यह खतरनाक संगठन भारत में पांव न पसार पाए।’