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जलियावाला बाग: जनरल डायर ने निहत्थों पर चलवाई गोलियां, लाशों से पट गया था कुंआ

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 13, 2016 06:06 pm IST,  Updated : Apr 13, 2016 06:06 pm IST

13 अप्रैल 1919 के दिन ही जनरल डायर ने जलियावाला बाग में निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया था।

Jallianwala Bagh- India TV Hindi
Jallianwala Bagh

नई दिल्ली: इतिहास में दर्ज आज के दिन को कोई भी याद नहीं रखना चाहेगा। 13 अप्रैल 1919 के दिन ही जनरल डायर ने जलियावाला बाग में निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया था। जान बचाने के लिए लोग वहां मौजूद कुंए में कूद गए थे। देखते ही देखते पूरा कुंआ इंसान की लाशों से पट गया था। अंग्रेज सरकार की तरफ से गुलाम भारत पर ढाए गए इस जुर्म की ब्रिटेन में प्रशंसा की गई थी।

इंकलाब के नारों पर अंग्रेजों का दमनकारी रास्ता:

साल 1919 आते-आते अंग्रेजों के विरूद्ध हिंदुस्तानी क्रांतिकारियों के रास्ते और तरीके धीरे-धीरे व्यापक होते जा रहे थे। गुलाम भारत में उन दिनों इंकलाब जिंदाबाद के नारे आम बात थी। ये नारे अंग्रेजों को सहन नहीं होते थे। हर कोई आजादी की मांग कर रहा था। पंजाब में अंग्रेजों की दमनकारी नीतियां चरम पर थीं।

जलियावाला बाग में मौत का तांडव:

ब्रिटिश शासन ने पंजाब के दो बड़े नेताओं सत्यपाल और डॉ किचलू को निर्वासित कर दिया। ब्रिटिस सरकार के इस कदम से इन दोनों नेताओं के समर्थकों में आक्रोश भड़क उठा। इसी बीच बैसाखी का दिन आया। 13 अप्रैल 1919 के दिन लोग जलियावाला बाग में इकट्ठा होने लगे। बताया जाता है कि इस दिन यहां पर हजारों लोग इकट्ठा हुए थे। ब्रिटिश प्रशासन को इसकी भनक लग गई थी इसलिए एक दिन पहले ही मार्शल लॉ लागू कर दिया गया था और शहर में सेना बुला ली गई थी। इन दिनों जो लोग बैसाखी का मेला देखने भी आए थे वो भी जलियावाला बाग चले गए। हालांकि जलियावाला बाग में सभी शांतिपूर्वक सभा कर रहे थे, लेकिन डायर को इसमें कुछ गलत लगा और वो अपनी सैन्य टुकड़ी लेकर वहां पहुंच गया। जब तक लोग समझ पाते डायर ने अपनी टुकड़ी से गोलियां चलाने का आदेश दे दिया।

अंधाधुंध गोलियों की बौछार के बीच लोगों ने बचने की काफी कोशिशें की। कुछ ने ऊंची ऊंची दीवारों पर चढ़कर बच निकलने की भी कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। कुछ ने तो वहां बने कुंएं में कूदकर जान बचाने की कोशिश की। देखते ही देखते कुंआ लाशों से पट गया।

देश भर में भारी विरोध पर डॉयर को नहीं मिला दंड:

इस घटना का देशभर में भारी विरोध हुआ लेकिन डॉयर को दंडित नहीं किया गया। उलट डॉयर ने यह कहा कि हिंदुस्तानियों ने उस पर हमला किया था इसलिए उसे जवाबी कार्यवाही में ऐसा करना पड़ा। हंटर कमीशन ने इस घटना की जांच की लेकिन डायर को दंडित नहीं किया गया, लेकिन उसका पद घटाकर कर्नल कर दिया गया। साल 1927 में उसकी मौत हो गई थी।

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