नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में भीड़ ने पुलिस पर हमला कर मारे गए आतंकी का शव छीन लिया। साथ ही पुलिस की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। सुरक्षा बलों ने गुरुवार सुबह हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकियों को मार गिराया था। मारे गए आतंकियों के नाम नसीर पंडित और वसीम मल्ला है। इनमें से नसीर पहले पुलिसकर्मी था। दोनों हिजबुल के कमांडर बुरहान मुजफ्फर वानी के करीबी थे।
उनके मारे जाने से हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष नेतृत्व को गंभीर झटका लगा है। मल्ला ए प्लस प्लस श्रेणी का आतंकवादी था जबकि पिछले साल पुलिस छोड़कर हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ पंडित भी ए प्लस श्रेणी का आतंकवादी था। शोपियां के पेहलीपुरा का निवासी मल्ला पिछले साल 6 अप्रैल को शोपियां के अमशीपुरा गांव में तीन पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या के पीछे मुख्य साजिशकर्ता था। पुलवामा के करीमाबाद गांव का निवासी पंडित पिछले साल 27 मार्च को पीडीपी मंत्री अल्ताफ बुखारी के निवास से दो एके47 राइफलें लेकर फरार हो गया था। दोनों उन 11 युवा आतंकवादियों में शामिल थे जिनकी तस्वीरें पिछले साल सोशल मीडिया पर बहुत चर्चित हुई थीं।
इन दोनों को सुरक्षा बलों ने शोपियां के वेहिल गांव में मार गिराया था। दोनों ने भागने की कोशिश की और गोलियां भी चलाई। इसके बाद जब नसीर के शव को ले जाया जा रहा था तो लोगों ने प्रदर्शन किया। पुलवामा और शोपियां में लोग प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बुलेटप्रूफ गाड़ी को हाईजैक कर लिया। वे उसे पुलवामा से पांच किलोमीटर दूर करीमाबाद ले गए और उसे आग लगा दी।
करीमाबाद में नसीर के जनाजे में हजारों लोग शामिल हुए। साथ ही अज्ञात आतंकियों ने नसीर को 21 बंदूकों की सलामी दी। नसीर को दफनाने के समय चार बार नमाज पढ़ी गई। वहीं पहलीपुरा में भी वसीम को दफनाने के समय तीन अलग अलग जगहों पर नमाज पढ़ी गई। इसमें भी हजारों लोग शामिल हुए। पुलवामा के एसपी रईस अहमद मीर ने बताया,’ हां, पुलिस की एक गाड़ी को जला दिया गया। लेकिन इसे हाईजैक कहना गलत होगा क्योंकि वहां काफी भीड़ थी। पुलिस किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं चाहती थी।’