नई दिल्ली: कुंभ मेले के पहले 'शाही स्नान' में शनिवार को श्रद्धालु कम संख्या में पहुंचे। नासिक में घाट और गोदावरी नदी पर त्र्यंबकेश्वर के 20 घाटों पर सुबह में 'शाही स्नान' शुरू हुआ, जहां श्रद्धालुओं की संख्या मात्र 500,000 रही। नासिक में अब 13 और 18 सितंबर को शाही स्नान है, वहीं त्र्यंबकेश्वर में इन दोनों तारीखों के अलावा 25 सितंबर को भी शाही स्नान होगा।
आयोजन ने 'शाही स्नान' में 3 लाख लोगों के आने की उम्मीद की थी, जिसके लिए व्यापक इंतजाम किए थे पर कम लोग पहुंचे। कार्यक्रम में कम संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कई कारण हैं। इसका मुख्य कारण हाल ही गुजरात में गड़बड़ी का है। इसकी वजह से सड़कों और रेल यातायात ने श्रद्धालुओं को दूर रखा।
दूसरा कारण शुभ त्योहार रक्षाबंधन है। यह संयोग है कि शाही स्नान कार्यक्रम भी शनिवार को था, जिस वजह से लोग कम पहुंचे। उन्होंने बताया कि भीड़ पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए 16000 सुरक्षकर्मियों की तैनाती की गई।
हालांकि बग्गा को उम्मीद है कि सूर्यास्त के समय तक लगभग 1.50 लाख लोग 'शाही स्नान' कर चुके होंगे। कार्यक्रम शांतिपूर्वक चलाने के लिए दोनों कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा की कड़ी चौकसी है।
नासिक कुंभ की Live Coverage के लिए क्लिक करें।
- नासिक में वैसे तो कुंभ मेले की शुरुआत 14 जुलाई से हो चुकी है। लेकिन 29 अगस्त को नासिक और त्र्यंबकेश्वर दोनों जगहों पर पहला शाही स्नान हुआ। गौरतलब है कि अगस्त और सितंबर में 5 विशेष स्नान और शाही स्नान रहेंगे। इसमें 4 करोड़ से ज्यादा लोगों के शामिल होने का अनुमान है।
- दुनिया भर से आस्था के लिए लाखों लोगों के एकजुट होने का सबसे बड़े धार्मिक आयोजन सिंहस्थ कुंभ 14 जुलाई से चल रहा है। कुंभ को सबसे बड़े शांतिपूर्ण सम्मेलन के तौर पर जाना जाता है। कई अखाड़ों के साधु और लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं। ये उत्सव 58 दिनों तक चलेगा और 25 सितंबर को खत्म होगा।
- नासिक में शाही स्नान 29 अगस्त, 13 सितंबर और 18 सितंबर को होगा वहीं त्रयंबकेश्वर में शाही स्नान की तिथि 29 अगस्त, 13 और 25 सितंबर हैं। शाही स्नान की तिथियों पर नासिक में लगभग 80 लाख और त्र्यंबकेश्वर में 25-30 लाख लोगों के जुटने की संभावना है।
- कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार, इलाहाबाद, नासिक और उज्जैन में किया जाता है। हिन्दू पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवताओं और दैत्यों के बीच अमृत कुंभ को लेकर संघर्ष हुआ था जिसके बाद इन चार स्थानों में अमृत कुंभ से कुछ बूंदें गिर गई थीं।
- उज्जैन और नासिक में लगने वाले कुंभ को सिंहस्थ कुंभ भी कहते हैं। सूर्य ने कुंभ को टूटने से बचाया था। बृहस्पति ने उसे दानवों के हाथ में जाने से बचाया था और चंद्रमा ने अमृत को छलकने से बचाया था। और इन्हीं चार स्थानों पर विशेष तिथियों और गृह स्थितियों में कुंभ पर्व का बार-बार आना होता है।
कुंभ मेले के दौरान नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 29 अगस्त को होने वाले पहले शाही स्नान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला कलेक्टर दीपेंद्र सिंह कुश्वाह ने बताया कि वैष्णव सम्प्रदाय के दिगम्बर, निर्मोही और निर्वाणी अखाड़ों के हजारों महंत और साधु नासिक में पहला पवित्र स्नान करेंगे, जबकि शैव सम्प्रदाय के 10 अखाड़ों के महंत और साधु यहां से 30 किलोमीटर दूर त्र्यंबकेश्वर में पवित्र स्नान करेंगे।
नासिक पुलिस आयुक्त एस जगन्नाथ ने एक अधिसूचना जारी करते हुए नासिक में शाही जूलुस के मार्ग, महंतों और साधु की ओर से शाही स्नान के समय और विभिन्न अखाड़ों के जुलूस के क्रम सूचीबद्ध किए। अधिसूचना के अनुसार शाही जुलूस तपोवन के लक्ष्मीनारायण मंदिर से सुबह 6 बजे शुरू होगा।
अगली स्लाइड में पढ़े- कुंभ के दौरान नासिक में सुरक्षा के लिए 15000 पुलिसकर्मी