1. Hindi News
  2. पश्चिम बंगाल
  3. 'राजनीति में आना मेरी गलती थी', पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी के सुसाइड नोट में छलका दर्द

'राजनीति में आना मेरी गलती थी', पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी के सुसाइड नोट में छलका दर्द

 Reported By: Onkar Sarkar Written By: Niraj Kumar
 Published : Aug 16, 2026 11:39 am IST,  Updated : Aug 16, 2026 11:49 am IST

पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस के सीनियर लीडर आशीष बनर्जी की मौत के बाद सामने आए कथित सुसाइड नोट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नोट में आशीष बनर्जी ने राजनीति में अपने लंबे सफर और पार्टी के भीतर की परिस्थितियों को लेकर दर्द जाहिर किया।

Asish Banerjee- India TV Hindi
आशीष बनर्जी का सुसाइड नोट Image Source : REPORTER INPUT

कोलकाता:  बहुत से लोगों का सपना होता है कि वह राजनीति में आएं और ऊंचा मकाम हासिल करें लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी ने अपने सुसाइड नोट में जो दर्द बयां किया है उसने राजनीति में ईमानदार छवि के लोगों को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। इन नोट में आशीष बनर्जी ने राजनीति में अपने लंबे सफर, भ्रष्टाचार के आरोपों और उन्हें बदनाम किए जाने के प्रयासों को जिक्र किया और यह लिखा कि राजनीति में आना मेरी गलती थी।

कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा

आशीष ने लिखा, “मैं छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़ा रहा हूं। मैं कभी किसी तरह के भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा। मैं बर्दवान यूनिवर्सिटी में छात्र संगठन का जनरल सेक्रेटरी बना। वहां भी, मैं कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा। पॉलिटिकल मतभेद तो रहे हैं, लेकिन वे कभी पर्सनल दुश्मनी में नहीं बदले। हालांकि मैं पार्टी के अंदर होने वाली सभी गलतियों को कभी मान नहीं सका, लेकिन मैं उनका विरोध भी नहीं कर पाया। अपनी पूरी ज़िंदगी में, मैंने कभी किसी काम के बदले एक पैसा भी नहीं लिया।”

इस सुसाइड लेटर आशीष ने दावा किया कि तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी (TRDA) में उनके पास बहुत कम अधिकार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम करने और बेइज्जत करने की कोशिश में कई काम किए गए। उन कोशिशों की बुराई करते हुए, आशीष ने लिखा कि अब उन्हें लगता है कि राजनीति में आना एक गलती थी।

परिजनों को राजनीति में नहीं आने की सलाह

उन्होंने लिखा, “आम मीटिंग में शामिल होने के अलावा TRDA में मेरी कोई ज़िम्मेदारी नहीं थी। मैं टेंडर कमिटी का मेंबर नहीं था। मेरे पास चेक साइन करने या लेने का कोई अधिकार नहीं था। मैं प्लान मंज़ूर करने या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने में भी शामिल नहीं था। इन मामलों पर मुझसे कभी किसी ने बात नहीं की। मुझे बदनाम करने और बेइज्जत करने के लिए जो कुछ भी किया गया, मैं उसकी कड़ी निंदा करता हूं। आज, मुझे लगता है कि राजनीति में आना एक गलती थी। मैं अपने परिवार के लड़कों को सलाह देता हूं कि वे पॉलिटिक्स में न आएं। उन्हें अपने-अपने प्रोफेशन में लगे रहने दें।”

आशीष टीचिंग प्रोफेशन से भी जुड़े थे। उन्होंने सुसाइड लेटर अपने स्टूडेंट्स को भी याद किया। उन्होंने लिखा, “मैंने पूरी ज़िंदगी पढ़ाया है। मैंने कभी कोई क्लास नहीं छोड़ी। मैंने स्पेशल क्लास लीं और कई स्टूडेंट्स को फ्री में पढ़ाया। मुझे उनसे बहुत प्यार मिला।”

मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं-आशीष बनर्जी

फिर उन्होंने अपने परिवार वालों को अलग-अलग संबोधित किया और उन्हें शांत रहने की सलाह दी। लेटर के आखिर में, आशीष ने लिखा कि उनकी मौत के लिए कोई भी ज़िम्मेदार नहीं है। आशीष ने लेटर में राजनीति से जुड़े किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई सीधा आरोप नहीं लगाया, न ही उन्होंने यह साफ़ किया कि किसने कथित तौर पर उन्हें बेइज्जत करने या बदनाम करने की कोशिश की थी।

बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में रविवार सुबह फंदे से लटका मिला। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी ने 2001 से 2026 तक राज्य विधानसभा में रामपुरहाट निर्वाचन क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व किया था। वह विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार में स्कूली शिक्षा एवं कृषि समेत विभिन्न विभागों के मंत्री भी रहे। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या आशीष बनर्जी ने आत्महत्या की और यदि ऐसा है तो उन्हें किस वजह से यह कदम उठाना पड़ा। 

ये भी पढ़ें:

आरजी कर केस में बड़ा एक्शन, पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष गिरफ्तार; सबूत मिटाने का आरोप

 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। पश्चिम बंगाल से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।