पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सिउरी में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ और मारपीट की घटना सामने आई है। घटना के दौरान तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल भी दफ्तर में मौजूद थे। बताया जा रहा है कि बुधवार शाम कुछ लोग हाथों में लकड़ी के डंडे लेकर पार्टी कार्यालय में दाखिल हुए और अनुब्रत मंडल को घेर लिया। आरोप है कि उन्होंने अनुब्रत मंडल को कुर्सी पर बैठाया और उनके सामने ही दफ्तार में जमकर तोड़फोड़ की। इस दौरान अनुब्रत मंडल पर भी हमला हुआ।
घटना की सूचना मिलने के बाद सिउरी पुलिस स्टेशन की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और मामले की जांच की जा रही है। अनुब्रत मंडल का आरोप है कि तोड़फोड़ और हमले में शामिल लोग 'एंटी-सोशल' तत्व हैं और उनके बीजेपी से जुड़े होने का दावा किया। इससे पहले, अभिषेक बनर्जी के दफ्तर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी।
लाठी-डंडे लेकर ऑफिस में घुसे लोग
बताया जा रहा है कि अनुब्रत मंडल पार्टी के जिला कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ युवक लाठी-डंडे लेकर वहां पहुंच गए। आरोप है कि उन्होंने मंडल के साथ गाली-गलौज की और उनके साथ मारपीट की। हमलावरों ने अनुब्रत मंडल के सामने रखी कांच की टेबल को डंडे से तोड़ दिया। कांच टूटने से उसके टुकड़े मंडल के शरीर पर लगे। आरोप है कि एक युवक ने उनकी आंख के पास भी डंडे से वार किया।
VIDEO में दिखी पूरी घटना
घटना के वीडियो में अनुब्रत मंडल कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। उनके आस-पास ऑफिस का सामान बिखरा हुआ है। कांच की टेबल, कुर्सियां और बोतलें टूटी हुई दिखाई दे रही हैं। ऑफिस के कुछ अन्य सामान को भी नुकसान पहुंचा है। वीडियो में एक युवक चेहरे पर कपड़ा बांधे नजर आ रहा है। वहीं, दूसरे युवक के हाथ में लकड़ी का डंडा है और वह टेबल पर डंडा मारता दिखाई देता है।
कभी 'बीरभूम के टाइगर' कहे जाते थे अनुब्रत
अनुब्रत मंडल लंबे समय तक बीरभूम में TMC के बड़े नेताओं में रहे हैं। उन्हें 'बीरभूम का टाइगर' भी कहा जाता था। वह ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते रहे हैं और जिले में पार्टी के चुनावी कामकाज में उनकी बड़ी भूमिका रही है।
गिरफ्तारी के बाद बदली राजनीतिक स्थिति
अनुब्रत मंडल की गिरफ्तारी के बाद बीरभूम की राजनीति में उनकी सक्रियता कम हुई। 2023 के पंचायत चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वह जेल में थे। अब TMC के ही जिला कार्यालय में उनके साथ हुई इस घटना ने बीरभूम की राजनीति में फिर हलचल पैदा कर दी है।
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