नई दिल्ली: निवेशकों के लिए देश में उचित माहौल तैयार करने के उद्देश्य से लाए गए मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) विधेयक-2015 को लोकसभा में गुरुवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम-1996 में संशोधन के लिए इस विधेयक को कानून एवं न्याय मंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा ने तीन दिसंबर को सदन में पेश किया था।
विधेयक पर चर्चा के दौरान एक सवाल के जवाब देते हुए गौड़ा ने कहा कि यह विधेयक देश की कानून प्रणाली को नया आयाम प्रदान करेगा। मंत्री ने कहा कि इस विधेयक के तैयार करते समय एक संसदीय समिति और कानून आयोग द्वारा दिए गए सुझावों को ध्यान में रखा गया। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार देश की कानून प्रणाली में सुधार पर काम कर रही है।
मौजूदा कानून के तहत जहां अब तक मध्यस्थता से जुड़े मामलों को सिविल कोर्ट या मूल क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय देखते रहे हैं, वहीं इस विधेयक के अनुसार अब अंतर्राष्ट्रीय मध्स्थता से जुड़े मामलों को उच्च न्यायालय देखेंगे।
मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम-1996 के अनुसार, किसी अदालत के अंतरिम आदेश, किसी मध्यस्थ न्यायाधिकरण के आदेश और अपीलीय आदेश केवल उन मामलों में लागू होते हैं, जब मध्यस्थता भारत के अंदर हो।
संशोधित विधेयक के अनुसार, अब से ये प्रावधान अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता पर भी लागू होंगे, चाहे मध्यस्थता भारत के अंदर हो या नहीं। हालांकि यह तभी लागू होगा जब सभी पक्ष इस पर सहमत हों।