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नमामि गंगे परियोजना जनवरी 2016 से होगी शुरू, केंद्र सरकार वहन करेगी खर्च

 Written By: Bhasha
 Published : Nov 01, 2015 06:20 pm IST,  Updated : Nov 01, 2015 06:20 pm IST

नई दिल्ली: गंगा को अविरल और निर्मल बनाने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना जनवरी 2016 से शुरू होगी और इसे तीन चरणों में पूरा किया जायेगा जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार

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नमामि गंगे परियोजना जनवरी 2016 से होगी शुरू

नई दिल्ली: गंगा को अविरल और निर्मल बनाने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना जनवरी 2016 से शुरू होगी और इसे तीन चरणों में पूरा किया जायेगा जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। जल संसाधन, नदी विकास एचं गंगा संरक्षण मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

उल्लेखनीय है कि पहले केंद्र और राज्य के बीच खर्च का बंटवारा 75 : 25 के अनुपात में होने की बात कही गई थी। लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया और अब शत प्रतिशत खर्च केंद्र वहन करेगा।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जायेगा। पहले चरण को एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है जिसकी शुरूआत उत्तराखंड से होगी। इसमें गंगा नदी की अविरलता पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। गंगा नदी पर स्थित करीब 118 शहरों से प्रतिदिन निकलने वाले 363.6 करोड़ लीटर अपशिष्ट और 764 उद्योगों के हानिकारक प्रदूषकों के कारण नदी की धारा को निर्मल बनाना चुनौती बनकर सामने आया है।

इस विषय पर सरकार ने कहा है कि वह इन क्षेत्रों में उद्योगों से गंगा में आने वाले प्रवाह के समीप आधुनिक प्रौद्योगिकी युक्त ऐसे यंत्र लगाने जा रही है जिससे 15 मिनट से ज्यादा प्रदूषण फैलने की सूचना मिल जाएगी और उसके आधार पर उक्त उद्योग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि नदी के किनारे स्थिति उद्योगों से निकलने वाले प्रवाह को 24 घंटे चलने वाले प्रदूषण निगरानी उपकरण से जोड़ने का कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। यह नई प्रौद्योगिकी पर आधारित है और कई तरह की श्रेणियों में हैं। अधिकारी ने कहा कि अगर किसी उद्योग से नदी जल में पांच मिनट से ज्यादा प्रदूषण हुआ, तब एसएमएस आ जायेगा। अगर प्रदूषण 15 मिनट से ज्यादा हुआ तब कानूनी कार्रवाई शुरू हो जायेगी। हम प्रौद्योगिकी के माध्यम से नदियों में प्रदूषण पर लगाम लगाना चाहते हैं।

हाल ही में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के विशेषग्यों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा नदी के तट पर स्थित 118 शहरों से प्रतिदिन निकलने वाले 363.6 करोड़ लीटर अवशिष्ट और 764 उद्योगों के हानिकारक प्रदूषकों इस नदी की धारा निर्मल बनाने के समक्ष बड़ी चुनौती बन गए हैं।

कोलकाता में नदी में प्रतिदिन 53.4 करोड़ लीटर अवशिष्ट, कानपुर में 42.6 करोड़ लीटर, वाराणसी में 29.5 करोड़ लीटर, पटना में 25.2 करोड़ लीटर, इलाहाबाद में 2.32 करोड़ लीटर, मुरादाबाद में 11.7 करोड़ लीटर अविशष्ट गंगा नदी में गिरते हैं।

राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंगा नदी पर कुल 764 उद्योग अवस्थित हैं जिनमें 444 चमड़ा उद्योग, 27 रासायनिक उद्योग, 67 चीनी मिले, 33 शराब उद्योग, 22 खाद्य एवं डेयरी, 63 कपड़ा एवं रंग उद्योग, 67 कागज एवं पल्प उद्योग एवं 41 अन्य उद्योग शामिल हैं।

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