नई दिल्ली: केंद्र सरकार के अंतर्गत काम करने वाले उन कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग का फायदा नहीं मिलेगा जिनका प्रदर्शन कार्यालय में बेहतर नहीं रहता है। जो भी कर्मचारी प्रदर्शन के मापदंडों पर खरा नहीं पाया गया है उसे वेतन आयोग की वेतन बढ़ोतरी के दायरे में नहीं रखा जाएगा। 7वें वेतन आयोग के अंतर्गत जिन कर्मचारियों को फायदा दिया जाना है उन्हें उनके प्रदर्शन के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा जाएगा, गुड और वेरी गुड।
आयोग ने इस बार सभी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए प्रदर्शन आधारित वेतन बढ़ोतरी की अनुशंसा की है। गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग ने 19 नवंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कर्मचारियों के एक निश्चित वेतन बढ़ोतरी की अनुशंसा की गई थी।
वेतन वृद्धि को लेकर एक आम धारणा यह है कि आपकी वेतन बढोतरी और पद बढ़ोतरी एक साथ होती है। पैनल का मानना है कि धारणा यह भी है कि वेतन में बढ़त होने से करियर और बेहतर होने की दिशा में बढ़ जाता है और इस बढ़ोतरी में आपका प्रदर्शन कोई मायने नहीं रखता है।
आयोग का मानना है कि जो भी कर्मचारी प्रदर्शन के मानदंड़ो पर खरा नहीं उतरता है उसे सालाना इंक्रीमेंट प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। आयोग ने इस बार 20 वर्षों की नियमित पद्दोन्नति के साथ साथ उन लोगों की वेतन वृद्धि में रोक की अनुशंसा की है जो प्रदर्शन के बेंचमार्क को पूरा नहीं करते हैं। आयोग का मानना है कि यह कदम अकुशल कर्मचारियों के लिए बतौरक निवारक काम करेगा।