नई दिल्ली: हिंदू मंदिरों और हिंदुओं को लेकर पाकिस्तान जिस तरह का रुख अख्तियार करता है वो किसी से भी छुपा नहीं है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल 1971 की लड़ाई में जो पाकिस्तान की सबसे बड़ी हार हुई थी उसके पीछे एक देवी का हाथ था। भारतीय सेना के साहस के अलावा एक मां का आशीर्वाद भी पाकिस्तानी सेना की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार बना। इस मंदिर का नाम ढाकेश्वरी देवी है, जो कि एक प्रतिष्ठित और हिंदुओं की सबसे अराध्य देवी का मंदिर है। यहां आज भी श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है।
आपको बता दें कि ढाकेश्वरी मन्दिर ढाका का सबसे महत्वपूर्ण मन्दिर है। इन्हीं ढाकेश्वरी देवी के नाम पर ही ढाका का नामकरण हुआ है। भारत के विभाजन से पहले तक ढाकेश्वरी देवी मन्दिर सम्पूर्ण भारत के शक्तिपूजक समाज के लिए आस्था का बहुत बड़ा केन्द्र था। 12वीं शताब्दी में सेन राजवंश के बल्लाल सेन ने ढाकेश्वरी देवी मन्दिर का निर्माण करवाया था। ढाकेश्वरी पीठ की गिनती शक्तिपीठों में की जाती है क्योंकि यहां पर सती के आभूषण गिरे थे। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ढाका गए तो उन्होंने भी यहां ढाका की अधिष्ठात्री मां ढाकेश्वरी देवी के मंदिर के दर्शन कर पूजा आराधना की। अगर इस मंदिर का इतिहास बताए तो भारत पाकिस्तान युद्ध में इस मंदिर की अहम भूमिका रही है।
साल 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के वक्त पाकिस्तानी सेना ने इस मंदिर को तबाह कर दिया था। इसी मंदिर में शस्त्रागार भी बनाया गया। जब भारत ने पाकिस्तान से लड़कर बांग्लादेश को आजाद करवाया था उस समय देश को आजाद कराने में जितना हाथ भारतीय सैनिकों का था उतना ही हाथ देवी के आशीर्वाद का भी था। आज भी यहां पर लोग देवी के दर्शन करने के लिए आते हैं। ऐसा माना जाता है कि 1971 के युद्ध में भारतीय सैनिकों को मां का आशीर्वाद प्राप्त था। इस कारण पाकिस्तान को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। वहां के लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना ने मां का अपमान किया और मंदिर की परंपराओं को भी तोड़ा था।