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राष्ट्रपति ने सहिष्णुता का संदेश दोहराया

 Written By: PTI
 Published : Nov 21, 2015 03:46 pm IST,  Updated : Nov 21, 2015 05:55 pm IST

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि दुनिया अभी असहिष्णुता के बदतरीन आघात से निबटने के लिए संघर्ष कर रही है और यह आज के भारत की जटिल विविधता को एकजुट रखने वाले मूल्यों

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पढ़िए राष्ट्रपति का सहिष्णुता के लिए संदेश

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि दुनिया अभी असहिष्णुता के बदतरीन आघात से निबटने के लिए संघर्ष कर रही है और यह आज के भारत की जटिल विविधता को एकजुट रखने वाले मूल्यों को बल प्रदान करने तथा दुनिया भर में उसके प्रचार-प्रसार करने का वक्त है। भारतविदें की अब तक के पहले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुखर्जी ने लोगों को उन विचारों की याद दिलाई जिसके लिए भारत जाना जाता है। उन्होंने इस क्रम में स्वामी विवेकानंद का यह संदेश दोहराया कि दुनिया को अब भी भारत से ना सिर्फ सहिष्णुता, बल्कि संवेदना का विचार सीखना है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हम आज ऐसी घटनाओं से रूबरू हो रहे हैं जिसकी पहले कोई मिसाल नहीं थी, जब दुनिया असहिष्णुता और नफरत के बदतरीन आघात से निबटने के लिए संघर्ष कर रहा है जिनसे मानव जाति कभी रूबरू नहीं हुआ था। मुखर्जी ने कहा, ऐसे वक्त में खुद को उच्च मूल्यों, लिखित और अलिखित संस्कारों, कर्तव्यों और जीवन-शैली की याद दिलाने से बेहतर कोई रास्ता नहीं हो सकता जो भारत की आत्मा है। 

राष्ट्रपति ने इसपर भी जोर दिया कि यह सभ्यता के मूल्यों को बल प्रदान करने का वक्त है जो आज के भारत की जटिल विविधता को एकसाथ जोड़ता है और अपने आम अवाम तथा दुनिया मैं उसका प्रचार-प्रसार करने का वक्त है। दादरी में पीट-पीट कर हत्या करने और उसके बाद की घटनाओं से ही मुखर्जी सहिष्णुतता और बहुलवाद के लिए अपीलें कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने तीन दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा ले रहे विद्वानों से अपील की कि वे प्राचीन काल में ही विचरते रहने तक सिमटे नहीं रहें या लोगों को भारत के गौरवशाली अतीत की बस याद दिलाते नहीं रहें बल्कि इसे उजागर करें कि किस तरह बहुलवाद और बहु-संस्कृतिवाद भारतीय जनमानस के केन्द्र में है। उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि अगले तीन दिन तक आपका विमर्श यह उजागर करेगा कि किस तरह बहुलवाद और बहु-संस्कृतिवाद भारतीय जनमानस के केन्द्र में है। वे निश्चित रूप से भारत-विग्यान के क्षेत्र में मौजूद सूचनाओं के हमारे भंडार में महत्वपूर्ण योगदान करेंगे। 

राष्ट्रपति ने जर्मनी के प्रोफेसर एमेरिटस हेनरीख फ्रीहेर वोन स्तीतेनक्रोन को प्रतिष्ठित भारतविद् पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत-विग्यान के क्षेत्र में उनके योगदान पर दिया गया। विदेश मंत्रालय एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की ओर से स्थापित इस पुरस्कार के तहत 20 हजार डालर और एक प्रशस्तिपत्र दिया जाता है। इस अवसर पर विदेशमंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद थीं। मुखर्जी ने दुनिया भर की युवा पीढ़ी से आयुर्वेद और अन्य प्राचीन उपचार प्रणालियें को पढ़ने और उससे लाभ उठाने को कहा।

 
मुखर्जी ने कहा, योग की विश्व स्तर पर लोकप्रियता उन लोगों को अपनी जीवन शैली में सुधार करने में मदद करेगी जो इसे अपनाते हैं और अपनी शारीरिक एवं मानसिक बेहतरी की सक्रियतापूर्वक रक्षा करते हैं। मैं दुनिया की युवा पीढ़ी को आयुर्वेद और अन्य प्राचीन उपचार प्रणालियों का अध्ययन करने , अभ्यास करने और लाभान्वित होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगा। राष्ट्रपति ने कहा, मैं इस विग्यान का रोगों के समग्र उपचार के साथ निरंतर सामंजस्य के लिए उत्सुक हूं। मैं भारत और उसके विदेशी साझेदारों के बीच अकादमीय सहयोग में ज्यादा भारत-विग्यान देखना चाहूंगा। यह न सिर्फ इन दोस्ताना देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय विमर्श में नया आयाम जोड़ेंगे, बल्कि सहयोग और परस्पर समझ की एक और परत बनाएंगे। सम्मेलन में चीन और रूस समेत 22 भारतविद् हिस्सा ले रहे हैं। उनमें सात भारतीय विद्वान भी शामिल हैं। 

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