नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों दो दिवसीय रूस यात्रा पर हैं। मोदी की इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान रूस के साथ कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। मोदी भारत और रूस के बीच हर साल होने वाली 16वीं बैठक में शामिल होने जा रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जितने लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में हैं उतनी ही लोकप्रियता व्लादिमीर पुतिन की रूस में है। इन दोनों वैश्विक नेताओं में काफी हद तक समानताएं हैं। आज हम अपनी खबर में इन समानताओं पर भी चर्चा करने की कोशिश करेंगे, लेकिन उससे पहले समझिए मोदी के पूरे कार्यक्रम के बारे में......
क्या है मोदी का कार्यक्रम-
- बुधवार की शाम राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करेंगे। फिर दोनों मास्को में डिनर करेंगे। डिनर के बाद दोनों नेता गुरुवार को एक आधिकारिक मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात के बाद रक्षा और न्यूक्लियर ऊर्जा संबंधी मुद्दों पर अहम करार होने हैं।
- गुरुवार को पीएम मोदी मास्को के एक्सपो सेंटर में भारतीय समुदाय के 3000 लोगों को संबोधित करेंगे। रूस से रवाना होने से पहले पीएम मोदी सुरक्षा मसले पर बनी एक कैबिनेट समिति के साथ बैठक करेंगे। इसमें दो अहम समझौतों पर करार होना तय माना जा रहा है।
- भारत और रूस दोनों मिलकर 200 Kamov-2266T हेलीकॉप्टर का निर्माण कर रहे हैं। इसे भारत के रक्षा क्षेत्र के लिहाज से पीएम मोदी की मेक इन इंडिया मुहिम का पहला सफल कदम माना जा रहा है। वहीं इस यात्रा में यह संभावना भी जताई जा रही है कि रूस भारत को दूसरी परमाणु पनडुब्बी पट्टे पर दे दे। वहीं पिछले हफ्ते रक्षा मंत्रालय ने 40,000 की लागत वाली रशियन S-400 ट्रंफ वायु रक्षा मिसाइल को मंजूरी दे दी थी।
- इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आंतकवाद से निपटने के लिए सीरिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा करेंगे।
भारत को क्या मिलेगा:
- भारत और रूस के बीच न्यूक्लियर एनर्जी, द्विपक्षीय व्यापार और रक्षा संबंधी करीब 20 समझौतों पर करार होगा।
- दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 30 बिलियन डॉलर का हो जाएगा, जो फिलहाल 10 बिलियन डॉलर का है।
- न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को देखते हुए दोनों देश कुडनकुलम की इकाई 5 और 6 के लिए भी एक समझौते पर करार कर सकते हैं।
- रूस सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए साथ देने पर भी सहमति जता सकता है।
- भारत रूस पर यह दबाव बना सकता है कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित जानकारियां साझा करे।
- दोनों देशों के लोगों के बीच मेलजोल बढ़ाने और पर्यटन को बढ़ावा देने संबंधी मुद्दों पर भी बात हो सकती है।
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