उत्तर प्रदेश पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)द्वारा कानपुर में 97 करोड़ रुपये के प्रचलन से बाहर हो चुके पुराने नोटों की बरामदगी से कई सवाल खड़े होते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जो नोट अवैध हो चुके हैं और रद्दी से ज्यादा जिनकी कोई कीमत नहीं है तो फिर इतनी बड़ी संख्या में इन नोटों को छिपाकर क्यों रखा गया था?
एक थ्योरी के मुताबिक प्रचलन से बाहर हो चुके इन नोटों को नेपाल और भूटान के रास्ते बदलवाने के लिए रखा गया होगा, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये नोट दोनों पड़ोसी देशों में भी अब प्रचलन से बाहर हो चुके हैं।
वहीं दूसरी थ्योरी में कहा गया कि कोऑपरेटिव बैंक्स के जरिए आरबीआई से पुराने नोट बदलने की संभावना है, लेकिन वित्त मंत्रालय के अफसरों ने कहा कि इसकी कोई गुंजाइश नहीं है। यूपी पुलिस कह रही है कि वह इस मामले में RBI की मदद लेगी। RBI से पूछेगी कि बरामद किए गए पुराने नोटों का क्या किया जाए। लेकिन RBI के अफसर कह रहे हैं कि पुराने नोट अब रद्दी के टुकड़ों से ज्यादा कुछ नहीं हैं। RBI भी इन नोटों को नहीं लेगी। तो फिर इन नोटों को इक्कट्ठा क्यों किया गया था? इनका क्या इस्तेमाल होता ? ये सवाल अभी भी है जिसका जबाव अब वही लोग दे सकते हैं जिनके कब्जे से पुराने नोट मिले हैं। (रजत शर्मा)