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बलात्कार मामले में पति की जमानत रद्द कराने के लिए नाबालिग ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया

 Written By: Bhasha
 Published : May 01, 2016 11:39 am IST,  Updated : May 01, 2016 11:39 am IST

नाबालिग लड़की ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर अपने पति की जमानत को रद्द करने की मांग की है जिसने कथित रूप से उसका यौन उत्पीड़न किया था।

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नई दिल्ली: एक नाबालिग लड़की ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर अपने पति की जमानत को रद्द करने की मांग की है जिसने कथित रूप से उसका यौन उत्पीड़न किया था और बाद में अपने खिलाफ दर्ज मामले में जमानत हासिल करने के लिए उससे शादी कर ली थी।

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याचिका कर्ता ने पिछले वर्ष दिसम्बर में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है जिसने उसके पति की जमानत को रद्द करने के लिए दायर याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि नाबालिग पीड़िता विवाह कानून के मुताबिक अपने आरोपों के बारे में उचित उपचार हासिल कर सकती है।

आरोपी बाल यौन अपराध संरक्षण कानून 'पोकसो' घर में घुसने और लड़की का यौन उत्पीड़न करते समय उसको चोट पहुंचाने कानून के तहत आरोपों का सामना कर रहा है। याचिका के मुताबिक आरोपी ने पीडि़ता का मार्च 2014 से अगस्त 2014 के बीच कई बार यौन उत्पीड़न किया था जब वह 15 वर्ष की थी। उसकी शिकायत पर लड़के को गिरफ्तार कर लिया गया और 15 सितम्बर 2014 को लड़की से शादी करने के लिए उसे अंतरिम जमानत दे दी गई।

बाद में सितम्बर 2014 में उसे नियमित जमानत दे दी गई। अंतरिम जमानत मिलने के बाद दोनों ने शादी कर ली लेकिन अप्रैल 2015 में लड़के के पक्ष में उसका बयान रिकॉर्ड हो जाने के बाद उसे ससुराल वालों ने घर से बाहर निकाल दिया।

वकील ए पी सिंह के माध्मय से दायर अपनी याचिका में उसने आरोप लगाए कि जमानत मिलने के बाद आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों ने उसका शारीरिक और मानसिक रूप से उत्पीड़न शुरू कर दिया और दहेज की मांग करने लगे। लड़की की मां ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया कि उसे और उसके परिवार के सदस्यों को आरोपी ने धमकी दी कि अगर उन्होंने मामला वापस नहीं लिया तो उन्हें परिणाम भुगतने होंगे।

याचिका में कहा गया है, निचली अदालत के न्यायाधीश ने नाबालिग लड़की की शादी को मंजूरी दे दी है जो कानून के तहत वैध नहीं है। निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया जाना चाहिए।

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