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संस्कृतियों के समागम का माध्यम है कला: सच्चिदानंद जोशी

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 27, 2016 11:54 pm IST,  Updated : Aug 27, 2016 11:57 pm IST

कला एक ऐसा माध्यम है जो लोगों को जोड़ती है। वह संस्कृतियों के समागम का माध्यम भी है। कलाकार को किसी सांचे में नहीं बंधा होना चाहिए।

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नई दिल्ली: कला एक ऐसा माध्यम है जो लोगों को जोड़ती है। वह संस्कृतियों के समागम का माध्यम भी है। कलाकार को किसी सांचे में नहीं बंधा होना चाहिए। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डा. सच्चिदानंद जोशी ने डा. कायनात काजी की फोटो प्रदर्शनी “सबरंग” के उद्धाटन के मौके पर ये बातें कही। उन्होंने कहा कि कायनात काजी ने भारतीय कारीगरी की परंपरा को जिस तरह से अपनी फोटो प्रदर्शनी में दर्शाया है, वह सराहनीय है।

जानेमाने फोटोग्राफर और डीडी न्यूज के सीनियर कंसल्टिंग एडीटर विजय क्रांति ने कहा कि कायनात की फोटोग्राफी में जीवन का हर रंग और हर पहलू मौजूद है। महिला हो या बच्चा, दुख हो या सुख, उत्सव हो या पंरपरा, गांव हो या शहर, दस्तकारी हो या कलाकारी, खानपान हो या जीवन शैली, सभी को उनके कैमरे ने बखूबी कैद किया है।

वरिष्ठ टीवी पत्रकार और जानेमाने स्तंभकार अनंत विजय ने कहा कि संवेदनशीलता कला का एक विशिष्ट गुण है। कलाकार जब तक संवेदनशील नहीं होगा, तब तक न तो वह अपना सामाजिक सरोकार का दायित्व निभा पाएगा और न ही अपनी कला को उत्कृष्ट बना पाएगा।

डॉ. कायानत काजी एक सोलो फीमेल ट्रेवलर के रूप में महज तीन वर्षों में ही देश-विदेश में करीब 80 हजार किलोमीटर की दूरी नाप चुकी हैं। डॉ. कायनात काज़ी ने यायावरी करते हुए भारत की विविधता को करीब से देखा और महसूस किया कि इसकी संस्कृति के अनगिनत रंग हैं। उनके पास प्रकृति, जीवन शैली, कला, संस्कृति, पुरातत्व, ऐतिहासिक धरोहर, ग्राम्य जीवन आदि विषयों पर फोटो का विशाल कलेक्शन है। जिनमें से कुछ तस्वीरें “सबरंग” में दर्शायी गई हैं।

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