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बंगाल के सचिव, डीजीपी व कोलकाता पुलिस आयुक्त ने न्यायालय में सीबीआई के आरोपों से इंकार किया

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Feb 18, 2019 08:09 pm IST,  Updated : Feb 18, 2019 08:09 pm IST

उच्चतम न्यायालय में पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस ने सोमवार को सीबीआई के इन आरोपों को खारिज किया कि उन्होंने सारदा चिटफंड घोटाले की जांच को बाधित किया है।

Saradha scam: WB chief secy, DGP, Kolkata Police chief tender 'unconditional apology' in SC- India TV Hindi
Saradha scam: WB chief secy, DGP, Kolkata Police chief tender 'unconditional apology' in SC

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय में पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस ने सोमवार को सीबीआई के इन आरोपों को खारिज किया कि उन्होंने सारदा चिटफंड घोटाले की जांच को बाधित किया है। प्रदेश की पुलिस ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने बिना उपयुक्त कागजातों के तीन फरवरी को कोलकाता के पुलिस आयुक्त के आवास में जबरन प्रवेश करने की कोशिश की। प्रदेश के मुख्य सचिव मलय कुमार डे, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वीरेन्द्र कुमार और कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार ने सीबीआई की अवमानना याचिका पर अपने-अपने हलफनामे दाखिल किये और अदालत की कथित अवज्ञा को लेकर ‘बिना शर्त और स्पष्ट तौर पर माफी’ मांगी।

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बहरहाल, तीनों ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य पुलिस ने कभी भी जांच को बाधित नहीं किया और न ही किसी भी अधिकारी ने सीबीआई को सहयोग करने से इनकार किया। अधिकारियों ने अपने खिलाफ अवमानना याचिका का विरोध किया, जिसमें सीबीआई ने आरोप लगाया है कि वे सबूतों से छेड़छाड़ कर रहे थे और जांच से संबंधित शीर्ष अदालत के विभिन्न आदेशों का पालन नहीं कर रहे थे। सीबीआई अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार के अफसरों ने कहा कि सीबीआई को यह निर्देश देने की जरूरत है कि वह बिना किसी ठोस सबूतों के हवा में आरोप न लगाए।

तीन फरवरी की घटना का हवाला देते हुए पुलिस आयुक्त राजीव कुमार ने अपने हलफनामे में कहा कि सीबीआई ने बिना उपयुक्त कागज़ातों के उनके आवास में जबरन घुसने की कोशिश। इस दलील का डीजीपी ने अपने हलफनामे में समर्थन किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कोई भी पुलिस अधिकारी ‘धरना मंच’ पर नहीं गया था जहां पश्चिम बंगाल की मुख्मयंत्री सीबीआई की कार्रवाई के खिलाफ धरने पर बैठ गई थी। सीबीआई ने कुमार के खिलाफ कॉल विवरण रिकॉर्ड समेत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। इस पर कुमार ने कहा कि कोई साक्ष्य, सामग्री या दस्तावेज कभी भी उनके सीधे कब्जे में नहीं रहे।

उन्होंने पांच फरवरी को अदालत की ओर से जारी नोटिसों का जवाब दिया है जिनमें अदालत ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ और राज्य पुलिस द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का सहयोग नहीं करने के आरोपों पर सफाई मांगी थी। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा था कि इन अधिकारियों के हलफनामों के अवलोकन के बाद ही यह निर्णय किया जायेगा कि उन्हें 20 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने की आवश्यकता है या नहीं। पीठ ने कहा था कि न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल 19 फरवरी को तीनों अधिकारियों को सूचित करेंगे कि क्या उन्हें 20 फरवरी को उपस्थित होना है या नहीं।

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