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वाड्रा मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश के हवाले

 Written By: IANS
 Published : May 14, 2015 07:48 am IST,  Updated : May 14, 2015 09:17 am IST

चंडीगढ़: सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े लाखों रुपये के विवादित जमीन सौदा मामले सहित राज्य में पिछले 10 सालों में कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान हुई सभी अनियमितताओं की जांच

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वाड्रा मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश के हवाले

चंडीगढ़: सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े लाखों रुपये के विवादित जमीन सौदा मामले सहित राज्य में पिछले 10 सालों में कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान हुई सभी अनियमितताओं की जांच करेंगे। यह जानकारी हरियाणा के एक वरिष्ठ मंत्री ने बुधवार को दी।

हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने मीडिया को यहां बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कांग्रेस के पिछले 10 सालों के कार्यकाल के दौरान हुई अनियमितता, विशेषकर जमीन सौदे से जुड़े मामले की जांच करेंगे।

जांच की घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में लाए गए भूमि अधिग्रहण विधेयक पर कड़ा रुख अख्तियार कर रखा है। कांग्रेस कह रही है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक किसानों के हित में नहीं है।

शर्मा ने कहा, "जमीन सौदे सहित सभी अनियमितताओं की जांच की जाएगी। 15 मई को आयोग अधिसूचना जारी करेगा।"

मंत्री ने कहा कि अक्टूबर में सत्ता में आई भाजपा सरकार को कांग्रेस शासन के दौरान हुई कई अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं।

हरियाणा में मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद वाड्रा पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सस्ती दरों पर जमीन खरीद कर ऊंची दरों पर बेचने का आरोप है।

गुड़गांव जिले में वाड्रा की कंपनी ने रियल्टी कंपनी डीएलएफ के साथ जमीन का एक सौदा 58 करोड़ रुपये में किया था।

मार्च में भाजपा ने कांग्रेस पर यह कह कर निशाना साधा था कि हरियाणा में हुड्डा सरकार के दौरान जमीन सौदे के मामले में भारी घोटाला हुआ है।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने हुड्डा सरकार पर वाड्रा का पक्ष लेने का आरोप लगाया था, जिन्हें विवादित जमीन सौदे से लाखों की कमाई हुई है।

कैग के इस दावे के बाद वाड्रा पर आरोप लगाए गए हैं।

वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए सौदे को रद्द करने वाले हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने आरोप लगाया था कि कैग रपट में उन्हें दोषमुक्त करार दिया गया है।

हरियाणा विधानसभा में मार्च में कैग की रपट पेश की गई थी, जिसमें हुड्डा सरकार पर वाड्रा का अनुचित पक्ष लेने की बात कही गई है।

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