
विशाखा गाइडलाइन: जयपुर (राजस्थान) के भटेरी गांव में एक महिला भंवरी देवी ने बाल विवाह विरोधी अभियान में अहम भूमिका निभाई थी लेकिन उसे इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। साल 1992 में उसके साथ बलात्कार किया गया। इस मामले में कानूनी फैसला आने के बाद विशाखा और अन्य महिला गुटों ने सुप्रीमकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई की कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए संविधान की धारा 14,19, 21 को तहत कुछ अहम कानूनी प्रावधान किए जाएं। इस मामले को विशाखा और अन्य बनाम राजस्थान सरकार और भारत सरकार के मामले के तौर पर जाना गया। इस मामले में कामकाजी महिलाओं को यौन प्रताड़ना, उत्पीड़न और हिंसा के बचाने के लिए कोर्ट ने विशाशा दिशानिर्देश उपलब्ध करवाए। इसके साथ ही अगस्त 1997 में इस फैसले के तहत वर्कप्लेस (कार्यस्थल) पर यौन उत्पीड़न की परिभाषा का भी उल्लेख किया गया। कोर्ट ने कुछ अहम दिशानिर्देश भी तय किए जिन्हें विशाखा दिशानिर्देश के तौर पर जाना जाता है।
महिलाओं की सुरक्षा को तैयार हुआ था वर्कप्लेस बिल- कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए वर्कप्लेस बिल 2012 भी लाया गया था जिसमें लिंग समानता, जीवन और स्वतंत्रता के अधिकारों से जुड़े कड़े कानून बनाए गए हैं। कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से यह कानून काफी अहम है। इस कानून मे यह बताया गया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के सम्मान को बरकरार रखने के लिए क्या कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। अगर कोई महिला किसी घटना का शिकार होती है तो उसे कहां जाना चाहिए और अपना विरोध किस प्रकार दर्ज कराना चाहिए इस बात का भी उल्लेख इसमें है।