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Video: एक भारतीय फौजी की दास्तान, बर्फीले तूफान से कैसे लड़ा लांस नायक ?

 Written By: India TV News Desk
 Published : Feb 09, 2016 08:19 pm IST,  Updated : Feb 09, 2016 08:24 pm IST

नई दिल्ली: 6 दिन तक 25 फीट बर्फ के नीचे, सांस लेने तक की ऑक्सीजन नहीं थी फिर भी एक जांबाज 6 दिन तक जिंदा रहा। सियाचिन में ये चमत्कार हुआ है। 3 फरवरी को

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नई दिल्ली: 6 दिन तक 25 फीट बर्फ के नीचे, सांस लेने तक की ऑक्सीजन नहीं थी फिर भी एक जांबाज 6 दिन तक जिंदा रहा। सियाचिन में ये चमत्कार हुआ है। 3 फरवरी को बर्फीले तूफान में 10 जवान जिंदा दफ्न हो गए थे लेकिन इनमें से एक लांस नायक मौत के मुंह से जिंदा निकल आया है। अब पूरा देश इस जवान की बहादुरी को सलाम और जल्द से जल्द ठीक होने की दुआ कर रहा है।

सियाचीन के जांबाज से मिले PM मोदी

चमत्कार की ये कहानी है लांस नायक हनुमंथप्पा कोप्पड़ की जो 6 दिन बाद मौत के मुंह से बाहर निकल कर आए हैं। देश के इस जांबाज की बहादुरी को हर कोई सलाम कर रहा है। हनुमंथप्पा का फिलहाल दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल जाकर देश के इस बहादुर लाल से मुलाकात की। आर्मी चीफ भी हॉस्पिटल पहुंचे।

बर्फीले तूफान से कैसे लड़ा लांस नायक ?

लांस नायक हनुमंथप्पा तूफान में फंसे थे लेकिन हालात इससे भी कहीं ज्यादा मुश्किल थे। मद्रास रेजीमेंट की उन्नीसवीं बटालियन के इस जवान के ऊपर 25 फीट मोटी बर्फ जमा थी। बर्फ के इसी ढेर के नीचे हनुमंथप्पा 6 दिन तक दबे रहे।

एक कैंप के पास 25 फीट से ज्यादा गहरा गड्ढा किया गया है। आर्मी का एक खोजी कुत्ता बर्फ के नीचे दबे जवानों की तलाश कर रहा है। पास में ही एक टीम अत्याधुनिक हथियारों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही थी। इनके पास बर्फ काटने की मशीनें थी। हनुमंथप्पा अपने 9 साथियों के साथ फंसे थे बाकी 9 लोगों को बचाया नहीं जा सका लेकिन हनुमंथप्पा 6 दिन बाद जिंदा लौट आए हैं।

  • हनुमंथप्पा 3 फरवरी को सियाचिन के सोनम बेस पर तैनात थे।
  • साथ में एक जेसीओ और 8 जवान भी थे।
  • बर्फीले तूफान के बाद हुए हिमस्खलन में सभी 10 जवान दब गए।

सियाचिन के बर्फीले कब्र से निकलकर लांस नायक हनुमंथप्पा दिल्ली तक कैसे आए?

इन फौजियों की तलाश में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था। 6 दिन बाद यानी 8 फरवरी को हनुमंथप्पा को एक खोजी कुत्ते ने ढूंढ निकाला। हनुमंत की हालत गंभीर थी मगर दिल की धड़कन और हाथों की पल्स दोनों चल रही थी।

डॉक्टरों की एक टीम ने पास के ही एक कैंप में पूरी रात इस बहादुर फौजी की देखभाल की। आज सुबह आर्मी के हेलीकॉप्टर से सियाचिन बेस कैंप लाया गया फिर वहां से थोइस एयरबेस जहां एयरफोर्स का जहाज पहले से तैनात था। डॉक्टरों की निगरानी में हनुमंथप्पा को दिल्ली के पालम एयरपोर्ट लाया गया फिर हेलीकॉप्टर के जरिए दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल ले जाया गया। अस्पताल में 5 डॉक्टरों की टीम इस फौजी का इलाज कर रही है।

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