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बगदादी का टेरर स्कूल जहां बच्चे बनते हैं सुसाइड बॉम्बर

 Written By: India TV News Desk
 Published : Nov 27, 2015 01:03 pm IST,  Updated : Nov 27, 2015 01:12 pm IST

नई दिल्ली: दुनिया में एक ऐसा स्कूल भी है जहां पर मासूम बच्चों को आतंकी बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है, एक ऐसा स्कूल जहां 7 साल से लेकर 14 साल के बच्चों को सुसाइड

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बगदादी का टेरर स्कूल जहां बच्चे बनते हैं सुसाइड बॉम्बर

नई दिल्ली: दुनिया में एक ऐसा स्कूल भी है जहां पर मासूम बच्चों को आतंकी बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है, एक ऐसा स्कूल जहां 7 साल से लेकर 14 साल के बच्चों को सुसाइड बॉम्बर बनाया जाता है। पहली बार बगदादी के टेरर स्कूल के बारे में जानकारी सामने आई है। इन बच्चों को सुसाइड बॉम्बर बनाने का बाकायदा कोर्स करवाया जाता है। इस कोर्स के दौरान ही उन्हें सुबह एक-47 चलाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है।

कम उम्र के मासूम किए जाते हैं तैयार-

बगदादी के इस टेरर स्कूल में 7 साल से लेकर 14 साल तक के बच्चों को खौफनाक मंसूबों के साथ तैयार किया जाता है। आंखमिचौली खेलने की उम्र में इन बच्चों को चलती फिरती मौत बना दिया जाता है। इन बच्चों को एके-47 जैसे खतरनाक हथियारों से गोलियां बरसाने की ट्रेनिंग दी जाती है। ये बच्चे दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन ISIS के एक इशारे पर पर किसी की जान ले भी सकते है और अपनी जान दे भी सकते है। चौकाने वाली बात यह है कि बगदादी की बच्चा ब्रिगेड में ऐसे लड़ाकों की तादाद दस हजार से ज्यादा बताई जाती है, पूरी दुनिया के लिए ये खतरा इतना भर नहीं है, अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआईए की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन दिनों सीरिया और इराक में हर दिन करीब 400 से 500 बच्चे आईएसआईएस में शामिल हो रहे हैं। हकीकत की जमीन पर ये आकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ ISIS छोड़कर घर लौटे एक बच्चे का दावा है कि जन्नत के नाम पर बगदादी एंड कंपनी बचपन को आतंक की भट्ठी में झोंक रही है।

कहां बगदादी तैयार कर रहा है बच्चा बम-

बगदादी की पाठशाला में बच्चे 90 दिन में सुसाइड बॉम्बर बन जाते है। इराक के रक्का में ही आतंकी संगठन आईएसआईएस का एक टेरर कैंप है, जहां मासूम बच्चों को आतंकी बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। बगदादी के इस टेरर स्कूल में मासूमों को हर वो हुनर सिखाया जाता है, जिसका इस्तेमाल दहशतगर्दी फैलाने के लिए किया जाता है। इस स्कूल में बच्चों को एक-47 और एलएमजी जैसे अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है।

कैसे होती है भर्ती-

दरअसल, बगदादी एंड कंपनी सबसे पहले एक खास महजब के नाम पर मासूम बच्चों का ब्रेनवॉश करती है। मासूमों को ये भी बताया जाता है कि जेहाद में मारे जाने पर वो शहीद कहलाएंगे और इस शहादत के लिए उन्हें सीधे जन्नत में जगह मिलेगी। यही वजह है कि मासूम बच्चे बगदादी के टेरर स्कूल में भर्ती हो जाते हैं और फिर शुरु होता है बच्चा बम बनाने का सिलसिला। आतंक के इस स्कूल में बच्चों को बताया जाता है कि बगदादी पूरी दुनिया में इस्लामिक स्टेट कायम करना चाहता है। इसके लिए उन्हें जिहाद की जंग लड़नी होगी और गैर मुसलमानों को मारना होगा।

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