1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. पाकिस्तान टू पठानकोट: वो सच जो अब तक किसी ने नहीं देखा

पाकिस्तान टू पठानकोट: वो सच जो अब तक किसी ने नहीं देखा

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jan 05, 2016 09:30 pm IST,  Updated : Jan 05, 2016 09:47 pm IST

नई दिल्ली: पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हमले से पहले आतंकियों ने जिस एसपी, कुक और ज्वैलर को अगवा किया था उन्होंने कई अहम खुलासे किए। किडनैपर्स ने गुरदासपुर के एसपी सालविंदर सिंह और उनके

pathankot terror attack- India TV Hindi
pathankot terror attack

नई दिल्ली: पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हमले से पहले आतंकियों ने जिस एसपी, कुक और ज्वैलर को अगवा किया था उन्होंने कई अहम खुलासे किए। किडनैपर्स ने गुरदासपुर के एसपी सालविंदर सिंह और उनके 2 दोस्तों को शुक्रवार को छोड़ दिया था हालांकि उनकी कार को लेते गए। एसपी और उनके दोस्तों कों गुरुवार देर रात किडनैप किया गया था।

उस काली रात की दास्तान

सूरज पूरी तरह ढल चुका था। उस सर्द मौसम में एसपी सलविंदर सिंह अपने दोस्त राजेश के साथ ख्वाजा साहब की दरगाह की तरफ बढ़ रहे थे। 31 दिसंबर की उस शाम एसपी सलविंदर सिंह ख्वाजा साहब के दरबार में मत्था टेकने आए थे। साथ में दोस्त राजेश वर्मा और उनका कुक भी था। सभी ने सजदा किया और इसी गाड़ी में बैठकर अपनी मंजिल की तरफ निकल पड़े।

ख्वाजा साहब से झोली भरने की दुआ मांगकर रात के करीब साढ़े 9 बजे सलविंदर वापस लौटे लेकिन ठंड के साथ-साथ अंधेरा भी घना था। एसयूवी की ड्राइविंग सीट पर राजेश वर्मा बैठे थे और ठीक बगल वाली सीट पर सादी वर्दी में एसपी सलविंदर सिंह और बीच वाली सीट पर उनका कुक बैठा हुआ था। मंजिल थी गुरदासपुर लेकिन सभी इस बात से पूरी तरह बेखबर थे कि अनजान रास्ते पर उनका सामना एक बड़े खतरे से होने वाला है।

सलविंदर सिंह पहली बार उस रास्ते से निकले। गाड़ी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। करीब ढ़ाई घंटे का सफर पूरा हो चुका था,इस दौरान फतेहपुर नगर में गाड़ी एक चेक पोस्ट से गुजरी लेकिन चंद मिनट बाद कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।

आधी रात, 6 दहशतगर्द और प्लान पठानकोट

सेना की वर्दी पहने चार लोगों ने गाड़ी को रूकने का इशारा किया। सभी के हाथों में एके-47 थी। इशारा मिलते ही राजेश वर्मा ने गाड़ी रोक दी लेकिन पलक झपकते ही सब कुछ बदल गया। तूफान की तेजी से कार को हाईजैक कर लिया गया। 2 आतंकियों ने गन प्वाइंट पर एसपी सलविन्दर सिंह और राजेश को काबू में किया,जबकि दो आतंकियों ने बीच वाली सीट पर बैठे कुक को। किसी को सोचने समझने का मौका तक नहीं मिला।

सभी के सिर पर एके-47 तनी हुई थी, आतंकियों ने गाड़ी चला रहे राजेश और आगे की सीट पर बैठे सलविंदर को जबरन बीच वाली सीट पर बैठा दिया। एक आतंकी गाड़ी चलाने लगा, जबकि तीन आतंकी मारपीट कर रहे थे और आतंकी लगातार धमकी दे रहे थे कि जिंदा रहना है तो खामोश रहो। आतंकियों ने गाडी हाईजैक कर ली और कार में सवार तीनों लोगों को बंधक बना लिया। अभी तक आतंकी अंजान थे कि बंधक बनाया गया एक शख्स एसपी है।

हमले की सबसे बड़ी गवाही का सच ?

ये कहानी हैं तीन गवाहों की गवाही की इस कहानी में कितनी हकीकत है और कितना फसाना ये तो जांच के बाद पता चलेगा लेकिन एसपी सालविंदर की बात पर यकीन करें तो अब गाड़ी में AK-47 से लैस 4 से 5 दशहतगर्द सवार हो चुके थे। आतंकियों ने सबसे पहले गाड़ी के अंदर बैठे तीनों लोगों को कुछ इस तरह डरा-धमकाकर काबू में किया और फिर पंजाबी और उर्दू में बातें करने लगे। उनकी जुबान और उनका लहजा सुनकर साफ हो चुका था कि उनके इरादे बेहद खतरनाक है। आतंकी कोडवर्ड में बात कर रहे थे और बार बार किसी एयरफोर्स का नाम ले रहे थे।

आतंकियों ने कोहनिया मोड से गाड़ी को हाईजैक किया। अंधेरा होने के वजह से न सलविंदर और राजेश चारों आतंकियों को ठीक से देख सके और न ही आतंकियों ने गाड़ी के ऊपर लगी बत्ती देखी लेकिन बंधक बने तीनों बखूबी समझ चुके थे कि अब मौत पक्की है क्योंकि सेना की वर्दी में कोई और नहीं बल्कि आतंकवादी है। चलती गाड़ी में ही आतंकियों ने सलविंदर, राजेश और मदन से मारपीट शुरू कर दी एके-47 की बट से बुरी तरह हमला किया गया। और तो और आतंकियों ने सलविंद और राजेश के मोबाइल छीनकर बातचीत शुरू कर दी।

कोडवर्ड में बातचीत कर रहे थे आतंकी

एक आतंकी छीने गए मोबाइल से अपने आका से बातचीत कर रहा था। पुलिस महकमे में एसपी के ओहदे पर काम करने वाले सलविंदर आतंकियों की बातचीत से समझ गए कि मामला किसी बड़े आतंकी हमले का है। दरअसल आतंकी की ये बातचीत अपने आका से हो रही थी, जो किसी आतंकी हमले के बारे में पूछताछ कर रहा था। आतंकी कोडवर्ड में बातचीत कर रहे थे और बार-बार वो एयरफोर्स कहते हुए सुनाई दिए। यानी चंद घंटे के बाद जिस आतंकी हमले से पूरा देश हिल जानेवाला वाला था, उन्हीं आतंकियों ने हमले से पहले अपहरण कांड को अंजाम दिया।

चारों आतंकियों की उम्र 19 से 22 साल के बीच थी वो कभी उर्दू तो कभी हिंदी में बोल रहे थे लेकिन उनके मंसूबे बेहद खतरनाक थे। आतंकियों के पास जीपीएस था, जिसकी मदद से वो पठानकोट एयरबेस की तरफ बढ़ रहे थे। आतंकियों ने बातचीत के दौरान वो खुलासा किया जिसे सुनकर गाड़ी में मौजूद तीनों बंधकों की सांसे अटक गई। आतंकियों की बातचीत सुनकर किसी को भरोसा नहीं था कि वो जिंदा बचेगे, तीनों अपनी मौत का इंतजार करने लगे।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत