नई दिल्ली: उबर कैब बलात्कार मामले में आज दिल्ली की एक अदालत ने आरोपी चालक को 25 वर्षीय महिला के साथ अपनी टैक्सी में बलात्कार करने और उसकी जान खतरे में डालने का दोषी ठहराया। इस मामले का मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार है:
5 दिसंबर 2014 : अमेरिका स्थित कंपनी उबर कैब सेवा प्रदाता के चालक शिव कुमार पर वसंत विहार से अपने घर इंद्रलोक जा रही एक महिला के साथ टैक्सी में बलात्कार करने का आरोप लगा ।
7 दिसंबर 2014 : दिल्ली पुलिस ने यादव को उप्र के मथुरा से गिरफ्तार किया ।
8 दिसंबर 2014 : यादव को अदालत में पेश किया गया और फिर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया । उसने शिनाख्त परेड के लिए जाने से इंकार कर दिया । एक अन्य अदालत से आते हुए उसे पीडि़त ने बतौर हमलावर पहचाना ।
17 दिसंबर 2014 : कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए जालसाजी के एक अन्य मामले में यादव को पुलिस हिरासत में भेजा गया ।
24 दिसंबर 2014 : पुलिस ने घटना के 19 दिन बाद बलात्कार मामले मंे यादव के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया ।
5 जनवरी 2015 : न्यायाधीश ने आरोप पत्र का संग्यान लिया और मामला सत्र अदालत में भेजा ।
9 जनवरी 2015 : विशेष फास्ट ट्रैक अदालत ने इस मामले में आरोप तय करने पर दलीलें सुनना शुरू किया । मामले में विशेष सरकारी वकील की नियुक्ति ।
13 जनवरी 2015 : अदालत ने यादव पर बलात्कार करते हुए पीड़ित की जान खतरे में डालने, उसे विवाह के लिए बाध्य करने के इरादे से उसका अपहरण करने, आपराधिक तरीके से उसे धमकाने और उसे चोट पहुंचाने के आरोप तय किए । न्यायाधीश ने दिन प्रतिदिन आधार पर सुनवाई का आदेश दिया ।
15 जनवरी 2015 : सुनवाई शुरू, पीड़ित ने अदालत में गवाही दी और आरोपी की शिनाख्त की ।
17 जनवरी 2015 : अदालत ने पीड़ित का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की ।
31 जनवरी 2015 : अभियोजन पक्ष की सबूत पेश करने की प्रक्रिया पूरी हुई ।
3 फरवरी 2015 : आरोपी का बयान लिया गया जिसने बलात्कार के आरोपों को नकारा और खुद को बेकसूर बताया
11 फरवरी 2015 : अदालत ने मामले में अंतिम दलीलों के लिए 16 फरवरी की तारीख नियत करते हुए कहा कि आरोपी सुनवाई में विलंब की कोशिश कर रहा है ।
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16 फरवरी 2015 : आरोपी ने अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों को फिर से बुलाने की मांग की ।
18 फरवरी 2015 : गवाहों को फिर से बुलाने की आरोपी की मांग खारिज ।
19 फरवरी 2015 : अंतिम दलीलें शुरू करते हुए अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी को सिर्फ पीड़ित की गवाही पर ही दोषी ठहराया जा सकता है ।
19 फरवरी 2015 : अभियोजन पक्ष के 28 गवाहों से फिर से जिरह किए जाने के आग्रह को ठुकराने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ चालक ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया ।
4 मार्च 2015 : उच्च न्यायालय ने पीड़ित सहित अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों को फिर से बुलाने की आरोपी की अपील को मंजूरी दी।
5 मार्च 2015 : निचली अदालत में बचाव पक्ष के वकील ने पीड़ित से फिर से सवाल जवाब किया । महिला ने कहा कि प्रक्रिया में विलंब की वजह से वह सदमे में है ।
9 मार्च 2015 : गवाहों को फिर से बुलाने के लिए आरोपी को मंजूरी दिए जाने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ पीड़ित की अपील पर उच्चतम न्यायालय 10 मार्च को सुनवाई करने पर सहमत।
10 मार्च 2015 : उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश और निचली अदालत की कार्रवाई पर रोक लगाई तथा पीड़ित की अपील पर पुलिस और आरोपी को नोटिस जारी किए ।
13 अगस्त 2015 : पीड़ित और पुलिस की अपील पर उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा ।
10 सितंबर 2015 : दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पीड़ित और गवाहों से दोबारा जिरह न की जाए और साथ ही उसने सुनवाई पर लगी रोक हटा दी ।
15 सितंबर 2015 : उच्चतम न्यायालय के पास से रिकॉर्ड्स न पहुंच पाने के कारण निचली अदालत अंतिम दलीलों को नहीं सुन सकी ।
24 सितंबर 2015 : आरोपी ने पुलिस पर सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया ।
7 अक्टूबर 2015 : बचाव पक्ष के वकील ने जिरह पूरी की, अदालत ने फैसला 20 अक्तूबर तक के लिए सुरक्षित रखा ।
20 अक्टूबर 2015 : अदालत ने यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 :2: :एम:, 366, 323 और 506 के तहत अपराधों का दोषी ठहराया । उसे दी जाने वाली सजा के अनुपात पर अदालत 23 अक्टूबर को दलीलें सुनेगी।