
उपहार सिनेमा कांड की टाइमलाइन-
13 जून 1997- उपहार सिनेमा हॉल में बार्डर फिल्म का शो। बेसमेंट में रखे जेनरेटर से धधकी आग। 59 लोगों की मौत।
22 जुलाई 1997- उपहार सिनेमा हॉल के मालिक सुशील अंसल और उनका बेटा प्रणव अंसल मुंबई से गिरफ्तार।
24 जुलाई 1997- जांच का जिम्मा दिल्ली पुलिस से सीबीआई को सौंपा गया।
15 नवंबर 1997- सीबीआइ ने सुशील अंसल, गोपाल अंसल समेत 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
10 मार्च 1999- सेशन कोर्ट में केस का ट्रायल शुरू।
27 फरवरी 2001- अदालत ने सभी को गैर इरादतन हत्या, लापरवाही व अन्य मामलों के तहत आरोपी माना।
23 मई 2001- मामले में गवाही का दौर शुरू हुआ।
4 अप्रैल 2002- दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत को दिया आदेश मामले का जल्द निपटारा हो।
27 जनवरी 2003- अदालत ने अंसल बंधुओं की याचिका खारिज की। इन्होंने उपहार सिनेमा को वापस उन्हें सौंपे जाने की मांग की थी। अदालत ने ऐसा करने से इनकार किया।
24 अप्रैल 2003- हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया 18 करोड़ रुपए का मुआवजा पीड़ितों के परिवार वालों को मिले।
4 सितंबर 2004- आरोपियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू।
5 नवंबर 2005- बचाव पक्ष के गवाहों की गवाही शुरू।
2 अगस्त 2006- बचाव पक्ष की गवाही पूरी।
9 अगस्त 2006- सेशन कोर्ट जज ममता सहगल ने उपहार सिनेमा का निरीक्षण किया।
14 फरवरी 2007- मामले की अंतिम जिरह शुरू हुई।
21 अगस्त 2007- उपहार कांड पीड़ितों के संगठन ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले का जल्द निपटारे की मांग की।
21 अगस्त 2007- सेशन कोर्ट का फैसला सुरक्षित।
20 नवंबर 2007- अदालत ने सुशील व गोपाल अंसल सहित 12 आरोपियों को दोषी करार दिया।
4 जनवरी 2008- हाईकोर्ट से अंसल बंधुओं को जमानत।
11 सितंबर 2008- सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं की जमानत रद की और तिहाड़ जेल भेजा।
17 नवंबर 2008- अंसल बंधुओं पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित।
19 दिसंबर 2008- हाईकोर्ट ने अंसल बंधुओं की सजा को दो साल से घटाकर एक साल किया।
30 जनवरी 2009- उपहार कांड पीड़ितों के संगठन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
31 जनवरी 2009- सीबीआइ ने भी अभियुक्तों की सजा को बढ़ाए जाने की मांग की।
17 अप्रैल 2013- सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं, उपहार कांड पीड़ितों व सीबीआइ की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
5 मार्च 2014- सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं की सजा को बरकरार रखा।
19 अगस्त 2015- सिनेमा हॉल के मालिक अंसल बंधु दोषी करार, लेकिन दोनों पर सिर्फ 30-30 करोड़ का जुर्माना लगा। दोनों को अब जेल नहीं।