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UPSC में किन्नरों के लिए नियम नहीं बना सकते: केंद्र

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 17, 2015 01:44 pm IST,  Updated : Jun 17, 2015 01:46 pm IST

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि वह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा के लिए दिए जाने वाले आवेदन में किन्नरों के लिए लिंग का अलग विकल्प

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UPSC में किन्नरों के लिए नियम नहीं बना सकते: केंद्र

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि वह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा के लिए दिए जाने वाले आवेदन में किन्नरों के लिए लिंग का अलग विकल्प देने से संबंधित नियम नहीं बना सकती, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें लेकर कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार और यूपीएससी से पूछा था कि इसकी प्रारंभिक परीक्षा से संबंधित आवेदन में किन्नरों के लिए लिंग का अलग विकल्प क्यों नहीं है?

यूपीएससी में आवेदन की अंतिम तिथि 19 जून है। न्यायालय यह जानना चाहता है कि परीक्षा के लिए योग्यता मानदंडो में किन्नर समुदाय को शामिल क्यों नहीं किया गया है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय इस तरह के लोगों को तीसरा लिंग घोषित कर चुका है।

अप्रैल 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने किन्नर समुदाय के लोगों को तीसरे लिंग का दर्जा दिया था।

इससे पहले किन्नरों को मजबूरन महिला अथवा पुरुष में से किसी एक विकल्प को अपने लिंग के तौर पर चुनना होता था। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि किन्नरों को आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा माना जाए।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि किन्नरों को शैक्षिक संस्थानों में दाखिला दिया जाएगा और उन्हें तीसरे लिंग की श्रेणी के आधार पर रोजगार दिया जाएगा।

न्यायालय में अधिवक्ता जमशेद अंसारी ने एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि लोकसेवा परीक्षाओं के लिए आवेदन पत्र में किन्नरों को पात्रता मानदंड अथवा लिंग विकल्प के रूप में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे किन्नर समुदाय को फायदा होगा, जिन्हें कि सामाजिक रूप से सार्वजनिक रोजगार से बाहर रखा गया है और वे सामाजिक पिछड़ेपन से पीड़ित हैं।

याचिका में कहा गया है कि तीसरे लिंग को विकल्प के तौर पर शामिल न किए जाने से 23 अगस्त को होने वाली परीक्षा में भाग लेने के लिए किन्नर समुदाय के लोग आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।

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