नई दिल्ली: इतिहास में कई वाकये ऐसे होते हैं, जहां सच्चाई परदे में रहती है और तरह-तरह के कयास सत्ता के गलियारों में तैरते रहते हैं। ऐसा ही एक राजनीतिक कयास है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दिल में प्रधानमंत्री बनने की ख्वाहिश थी। आज प्रणब मुखर्जी ने अपनी ऑटो बायोग्राफी का दूसरा हिस्सा जारी किया और उन हालातों का ज़िक्र, जिसमें इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री चुने गए। राष्ट्रपति ने बताया कि उनके मन में कभी प्रधानमंत्री बनने की इच्छा नहीं थी बल्कि ये कुछ कांग्रेस नेताओं की चुगली का नतीजा है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की नई किताब 'द टर्बुलेंट इयर्स: 1980-1996' रिलीज हुई है। ये राष्ट्रपति की वो किताब है, जिसमें उन तमाम सवालों के जवाब हैं जो पिछले 32 बरसों से सत्ता के गलियारों में अनसुलझी पहेली की तरह घूम रहे हैं। ये किताब उन कयासों का मुकम्मल जवाब है क्योंकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ख़ुद इन टर्बुलेंट इयर्स के एक अहम किरदार रहे हैं। ये किताब बताती है कि-
राष्ट्रपति की किताब में क्या है?
- इंदिरा गांधी की हत्या के बाद किस बात से डर गए थे राजीव गांधी?
- प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने से पहले राजीव किन आशंकाओं से घिरे थे?
- प्रणब मुखर्जी के दिल में क्या वाकई कोई महत्वाकांक्षा थी या ये महज़ सुनी-सुनाई बातें हैं?
- इंदिरा की हत्या की खबर सुनकर दिल्ली लौटते वक्त राजीव ने प्रणब मुखर्जी से क्या पूछा था?
क्या PM बनना चाहते थे प्रणब मुखर्जी?
सफदरजंग रोड में जब 32 साल पहले इंदिरा गांधी को गोली मारी गई तो राजीव गांधी पश्चिम बंगाल में रैली को संबोधित कर रहे थे। उस समय मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी राजीव गांधी के साथ मौजूद थे। इंदिरा को गोली लगने की ख़बर मिलते ही राजीव विशेष विमान से दिल्ली रवाना हुए। विमान में उनके साथ प्रणब मुखर्जी भी थे। ये कोलकाता से दिल्ली की वो विमान यात्रा थी जिसके बारे में कई किस्सागोई है। ऐसे तमाम कयासों का राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में जवाब दिया है।
अगली स्लाइड में पढ़िए राष्ट्रपति की किताब से कौन से कई राज़ बेपर्दा-