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भारतीय रेलवे स्टेशन की बुक शॉप का नाम A.H. Wheeler ही क्यों होता है'

 Written By: India TV News Desk
 Published : Nov 24, 2015 12:32 pm IST,  Updated : Nov 24, 2015 12:34 pm IST

नई दिल्ली: रेलवे स्टेशन पर तो हम सभी अक्सर जाया करते हैं। पढ़ने के शौकीन लोग वहां पर बनी बुक शॉप से किताबें भी खरीदते रहते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारतीय

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रेलवे स्टेशन की हर बुक शॉप का नाम A.H. Wheeler ही क्यों?

नई दिल्ली: रेलवे स्टेशन पर तो हम सभी अक्सर जाया करते हैं। पढ़ने के शौकीन लोग वहां पर बनी बुक शॉप से किताबें भी खरीदते रहते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारतीय रेलवे स्टेशनों की हर बुक शॉप का नाम A.H. Wheeler ही क्यों होता है। इसके पीछे एक छोटी सी कहानी है जिसे हम आज अपनी स्टोरी में बताएंगे।

हर बुक शॉप को Wheeler नाम ही क्यों मिला-

A.H.Wheeler नाम के पीछे एमिली मोरे नाम के एक फ्रेंच व्यक्ति का दिमाग था। मोरे साल 1857 में इलाहाबाद में रहा करते थे, जो एक अंग्रेजी फर्म बर्ड एंड कंपनी। मोरे किताबों को लेकर काफी जुनूनी व्यक्ति थे। मोरे इलाहाबाद छोड़ा चाहते थे, लेकिन उनके सामने एक अजीब समस्या थी। वह समस्या यह थी कि वो अपने भारी भरकम किताबों, जर्नल्स और मैगजीन के संग्रह का क्या करें। मोरे एक दिन इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर बैठे थे। उन्होंने देखा कि प्लेटफॉर्म से गुजर रहे यात्रियों में मैग्जीन, अखबार और किताबे पढ़ने में अच्छी खासी दिलचस्पी होती है। इसी वक्त उनके दिमाग में एक बुक शॉप का आईडिया आया।

उन्हें बुक स्टोर के बिजनेस में फायदे की गुंजाईश दिखी। उन्होंने एक बुक स्टोर खोला जिसका नाम उन्होंने अर्थर हेनरी व्हील रखा। यह उनके करीबी दोस्त का नाम था, जो कि लंदन का सबसे बड़ा बुक सेलर भी था। मोरे ने सोचा कि अंग्रेजी नाम से एक बेहतर ब्रांड वैल्यू मिलेगी और इसके बाद साल 1877 में इलाहाबाद से A.H.Wheeler ने बुक स्टोर की शुरुआत कर दी।

रेलवे के विस्तार के साथ इस बुक स्टोर ने भी अन्य स्टेशनों पर अपने पांव फैलाए। जल्द ही A.H.Wheeler's हर रेलवे स्टेशन का एक कॉमन नाम हो गया। यह बुक स्टोर स्टेशन पर हर आने जाने वाले के लिए आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी। शुरुआती तौर पर इस बुक स्टोर में काम करने वाले अधिकांश लोग आंग्ल भाषी और एंग्लो इंडियन हुआ करते थे।

हालांकि साल 1899 में टी के बनर्जी नामक शख्स के आने के बाद काफी कुछ बदलाव आए। बनर्जी ने अपनी अकाउंटिंग और ऑडिटिंग दक्षता के कारण प्रशंसा बटोरी और इन्हें इलाहाबाद के हेड ऑफिस भेज दिया गया। बनर्जी के नेतृत्व में Wheeler books Stall ने भारतीय रेल से संबद्ध कंपनियों से विज्ञापन लेना भी शुरु किया। लेकिन Wheeler से जुड़ा सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि इसने जल्द ही भारतीय भाषाओं से जुड़ी किताबें रखना भी शुरु किया। Wheelers का स्वतंत्रता आंदोलन में भी खासा योगदान मान जाता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस बुक स्टोर पर आंदोलन से जुड़ी सामग्रियां भी उपलब्ध रहती थीं।

(यह तथ्य क्वेरा डॉट कॉम पर पूछे गए एक सवाल के जवाब पर आधारित है।)

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